📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Muhammad Mahdi Karim/ Augustus Binu
शिक्षा
कर्नाटक हाई कोर्ट ने 50% से अधिक एससी‑एसटी आरक्षण को असंवैधानिक कहा
✍️ India Today
🗓 13 अक्टू. 2026, 04:31 AM
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कर्नाटक हाई कोर्ट ने 50% से अधिक सीटें एससी‑एसटी को आवंटित करने वाले राज्य आरक्षण नीति को असमानता के उल्लंघन के कारण निरस्त कर दिया है।
कर्नाटक हाई कोर्ट ने सोमवार को राज्य सरकार के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों में अनुसूचित जातियों (एससी) और अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के लिए संयुक्त आरक्षण 55 प्रतिशत निर्धारित किया गया था। कोर्ट ने कहा कि यह प्रतिशत सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित 50 प्रतिशत की सीमा से अधिक है, जिससे समानता के संवैधानिक सिद्धांत का उल्लंघन होता है।
निर्णय में यह स्पष्ट किया गया कि सकारात्मक कार्रवाई संभव है, परन्तु उसे पूर्वनिर्धारित सीमा के भीतर ही रखा जाना चाहिए। इस आदेश को इस वर्ष की शुरुआत में जारी किया गया था और इससे विपक्षी दलों व नागरिक समाज के समूहों में विरोध की लहर उठी थी, जिन्होंने कहा कि यह मेरिट‑आधारित प्रवेश को कमजोर करता है।
अदालत ने राज्य को अगली प्रवेश प्रक्रिया से पहले अपना आरक्षण ढांचा पुनः संशोधित करने का निर्देश दिया। सरकार को 30 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है, और अधिकतम सीमा से अधिक आरक्षण लागू करने पर इसे अवैध माना जाएगा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला 1992 के इंद्रा सावनी निर्णय को सुदृढ़ करता है और भविष्य में 50 प्रतिशत सीमा से अधिक आरक्षण की किसी भी कोशिश को न्यायिक जांच का सामना करना पड़ेगा।
कर्नाटक हाई कोर्ट का यह निर्णय अन्य राज्यों में चल रहे आरक्षण विवादों पर भी असर डाल सकता है, जहाँ सरकारें पिछड़े वर्गों के लिए अधिक कोटा लागू करने की सोच रही हैं।
निर्णय में यह स्पष्ट किया गया कि सकारात्मक कार्रवाई संभव है, परन्तु उसे पूर्वनिर्धारित सीमा के भीतर ही रखा जाना चाहिए। इस आदेश को इस वर्ष की शुरुआत में जारी किया गया था और इससे विपक्षी दलों व नागरिक समाज के समूहों में विरोध की लहर उठी थी, जिन्होंने कहा कि यह मेरिट‑आधारित प्रवेश को कमजोर करता है।
अदालत ने राज्य को अगली प्रवेश प्रक्रिया से पहले अपना आरक्षण ढांचा पुनः संशोधित करने का निर्देश दिया। सरकार को 30 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है, और अधिकतम सीमा से अधिक आरक्षण लागू करने पर इसे अवैध माना जाएगा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला 1992 के इंद्रा सावनी निर्णय को सुदृढ़ करता है और भविष्य में 50 प्रतिशत सीमा से अधिक आरक्षण की किसी भी कोशिश को न्यायिक जांच का सामना करना पड़ेगा।
कर्नाटक हाई कोर्ट का यह निर्णय अन्य राज्यों में चल रहे आरक्षण विवादों पर भी असर डाल सकता है, जहाँ सरकारें पिछड़े वर्गों के लिए अधिक कोटा लागू करने की सोच रही हैं।