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03 नव. 2026•
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कर्नाटक अदालत ने कहा: विकलांग व्यक्ति को आरक्षित भूमि के लिए आवेदन करना अनिवार्य
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Muhammad Mahdi Karim/ Augustus Binu
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कर्नाटक अदालत ने कहा: विकलांग व्यक्ति को आरक्षित भूमि के लिए आवेदन करना अनिवार्य

✍️ The Indian Express 🗓 03 नव. 2026, 05:17 AM 👁 17
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कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा कि विकलांग व्यक्ति को आरक्षित भूमि का दावा करने के लिए पहले आवेदन करना अनिवार्य है, जिससे राज्य के नियमों की प्रक्रिया स्पष्ट हुई।

बेंगलुरु, कर्नाटक – कर्नाटक हाई कोर्ट ने हालिया फैसले में कहा कि विकलांग व्यक्ति को आरक्षित भूमि का दावा करने के लिए पहले आधिकारिक रूप से आवेदन करना अनिवार्य है, यह अधिकार स्वचालित नहीं है। अदालत ने बताया कि राज्य के विकलांग कल्याण अधिनियम के तहत भूमि आवंटन के लिए आवेदन प्रक्रिया अनिवार्य है।

विचार-विमर्श में यह स्पष्ट किया गया कि बिना आवेदन के भूमि का दावा करने से वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और न्याय की भावना प्रभावित होगी। न्यायाधीशों ने कहा कि इस कदम से वास्तविक लाभार्थियों को ही आरक्षित भूमि मिल सकेगी।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय विकलांग आवेदकों को नियमानुसार कदम उठाने के महत्व को रेखांकित करता है, जिससे भविष्य में दावों में स्पष्टता आएगी और प्रशासनिक त्रुटियों से बचा जा सकेगा।

यह आदेश NGOs और विकलांग अधिकार संगठनों को भी चेतावनी देता है कि उन्हें अपने सदस्यों को आवेदन प्रक्रिया के बारे में सूचित करना चाहिए, ताकि किसी भी कानूनी जटिलता से बचा जा सके।

अदालत का यह आदेश तुरंत प्रभावी है, और बिना आवेदन के दायर किए गए किसी भी दावे को प्रक्रिया के अनुसार सुधारा नहीं गया तो खारिज किया जा सकता है।
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