📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Bryce Edwards from Dunedin, New Zealand
राजनीति
कर्नाटक कांग्रेस के महिला‑प्रधान कैबिनेट में डीके शिवाकुमार‑सिद्दारामैया का सत्ता संघर्ष
✍️ News18
🗓 21 अक्टू. 2026, 12:31 AM
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कर्नाटक कांग्रेस के महिला मंत्रियों से भरपूर नए कैबिनेट को वरिष्ठ नेता डीके शिवाकुमार और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारामैया के बीच सत्ता के टकराव के रूप में पढ़ा जा रहा है।
कर्नाटक कांग्रेस ने एक नया कैबिनेट घोषित किया है जिसमें महिलाओं को प्रमुख पदों पर नियुक्त किया गया है, जिससे राज्य में लैंगिक प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने का स्पष्ट इरादा दिखता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कैबिनेट केवल प्रतीकात्मक नहीं है; यह दो वरिष्ठ पार्टी नेताओं – डीके शिवाकुमार, वर्तमान राज्य पार्टी अध्यक्ष, और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारामैया, जो कांग्रेस के भीतर एक बड़ा समूह संभालते हैं – के बीच शक्ति परीक्षण के रूप में देखा जा रहा है।
यह घोषणा 2024 के लोकसभा चुनाव और आगामी राज्य विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले आई है, जिससे दोनों नेताओं के लिए उम्मीदवार चयन और नीतियों को आकार देने का अवसर मिल रहा है।
विश्लेषकों ने बताया कि शिवाकुमार और सिद्दारामैया ने अलग‑अलग समर्थन आधार तैयार किए हैं, और महिला‑प्रधान कैबिनेट इस बात का संकेतक बन सकता है कि कर्नाटक कांग्रेस में किसका प्रभाव अधिक है।
कैबिनेट की घोषणा बेंगलुरु में की गई, पर पार्टी ने किसी भी आंतरिक टकराव को लेकर टिप्पणी नहीं की, और केवल समावेशी शासन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर ज़ोर दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कैबिनेट केवल प्रतीकात्मक नहीं है; यह दो वरिष्ठ पार्टी नेताओं – डीके शिवाकुमार, वर्तमान राज्य पार्टी अध्यक्ष, और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारामैया, जो कांग्रेस के भीतर एक बड़ा समूह संभालते हैं – के बीच शक्ति परीक्षण के रूप में देखा जा रहा है।
यह घोषणा 2024 के लोकसभा चुनाव और आगामी राज्य विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले आई है, जिससे दोनों नेताओं के लिए उम्मीदवार चयन और नीतियों को आकार देने का अवसर मिल रहा है।
विश्लेषकों ने बताया कि शिवाकुमार और सिद्दारामैया ने अलग‑अलग समर्थन आधार तैयार किए हैं, और महिला‑प्रधान कैबिनेट इस बात का संकेतक बन सकता है कि कर्नाटक कांग्रेस में किसका प्रभाव अधिक है।
कैबिनेट की घोषणा बेंगलुरु में की गई, पर पार्टी ने किसी भी आंतरिक टकराव को लेकर टिप्पणी नहीं की, और केवल समावेशी शासन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर ज़ोर दिया।