📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Development of North Eastern Region
अपराध
कर्नाटक बीजेपी अधिकारियों को 7,561 मतदाता नाम हटाने के आरोप में बुक किया गया
✍️ News18
🗓 05 अक्टू. 2026, 12:17 PM
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कर्नाटक पुलिस ने बीजेपी के कुछ सदस्यों के खिलाफ 7,561 मतदाताओं के नाम हटाने के प्रयास के आरोप में मामला दर्ज किया है।
कर्नाटक पुलिस ने राज्य की बीजेपी के कई सदस्यों के खिलाफ 7,561 पंजीकृत मतदाताओं के नाम चुनावी सूची से हटाने के कथित प्रयास के लिए आपराधिक मामला दर्ज किया है। जिला क्राइम ब्रांच की जांच में बताया गया है कि यह अनियमितता बेंगलुरु में मतदाता डेटाबेस के एक नियमित ऑडिट के दौरान उजागर हुई।
पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, संदिग्धों ने चुनावी डेटाबेस तक पहुंच बनाकर निर्दिष्ट मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की, जिससे आगामी स्थानीय चुनावों पर असर पड़ सकता था। जब नवीनतम सत्यापन सूची में ये नाम नहीं दिखे, तो चुनाव अधिकारी ने असामान्यताओं को नोट किया और सिस्टम लॉग की फॉरेंसिक जांच शुरू की।
बीजेपी के प्रतिनिधियों ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी चुनावी प्रक्रिया की अखंडता का सम्मान करती है और ये आरोप निराधार हैं। एक वरिष्ठ पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि इस मामले को कानूनी रास्ते से सुलझाया जाएगा और आरोपित लोग जांच में सहयोग करेंगे।
यदि सिद्ध होता है, तो यह कार्य प्रतिनिधित्व अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत दंडनीय हो सकता है, जिसके तहत कारावास और सार्वजनिक पद से अयोग्यता जैसी सजा हो सकती है।
मामला अभी भी जांच के अधीन है, और पुलिस ने बुक किए गए व्यक्तियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। जांच के आगे बढ़ने पर अतिरिक्त जानकारी मिलने की उम्मीद है।
पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, संदिग्धों ने चुनावी डेटाबेस तक पहुंच बनाकर निर्दिष्ट मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की, जिससे आगामी स्थानीय चुनावों पर असर पड़ सकता था। जब नवीनतम सत्यापन सूची में ये नाम नहीं दिखे, तो चुनाव अधिकारी ने असामान्यताओं को नोट किया और सिस्टम लॉग की फॉरेंसिक जांच शुरू की।
बीजेपी के प्रतिनिधियों ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी चुनावी प्रक्रिया की अखंडता का सम्मान करती है और ये आरोप निराधार हैं। एक वरिष्ठ पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि इस मामले को कानूनी रास्ते से सुलझाया जाएगा और आरोपित लोग जांच में सहयोग करेंगे।
यदि सिद्ध होता है, तो यह कार्य प्रतिनिधित्व अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत दंडनीय हो सकता है, जिसके तहत कारावास और सार्वजनिक पद से अयोग्यता जैसी सजा हो सकती है।
मामला अभी भी जांच के अधीन है, और पुलिस ने बुक किए गए व्यक्तियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। जांच के आगे बढ़ने पर अतिरिक्त जानकारी मिलने की उम्मीद है।