📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Shagil Muzhappilangad
राजनीति
कर्नाटक ने सुप्रीम कोर्ट को बताया: बाइक टैक्सी सार्वजनिक परिवहन नहीं
✍️ The Hindu
🗓 11 अग. 2026, 09:03 PM
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कर्नाटक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि बाइक टैक्सी सार्वजनिक परिवहन नहीं हैं, जिससे वर्तमान वर्गीकरण पर सवाल उठता है।
पहला पैराग्राफ: कर्नाटक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें कहा गया है कि बाइक टैक्सी को सार्वजनिक परिवहन के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जाना चाहिए।
दूसरा पैराग्राफ: यह दावा मौजूदा नियामक ढांचे को चुनौती देता है, जो मोटरसाइकिल टैक्सी को सार्वजनिक परिवहन का एक रूप मानता है, जिससे लाइसेंसिंग, कर और सुरक्षा मानकों पर असर पड़ता है।
तीसरा पैराग्राफ: राज्य ने अपने दस्तावेज़ में तर्क दिया कि बाइक टैक्सी वाणिज्यिक आधार पर काम करती है और व्यक्तिगत यात्रियों की सेवा करती है, न कि सामान्य जनता की, इसलिए यह सार्वजनिक परिवहन की परिभाषा से बाहर है।
चौथा पैराग्राफ: सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक निर्णय नहीं दिया है, परंतु यह दायर किया गया याचिका भारत में माइक्रोमोबिलिटी सेवाओं के विनियमन पर चल रही बहस में एक महत्वपूर्ण कदम है।
दूसरा पैराग्राफ: यह दावा मौजूदा नियामक ढांचे को चुनौती देता है, जो मोटरसाइकिल टैक्सी को सार्वजनिक परिवहन का एक रूप मानता है, जिससे लाइसेंसिंग, कर और सुरक्षा मानकों पर असर पड़ता है।
तीसरा पैराग्राफ: राज्य ने अपने दस्तावेज़ में तर्क दिया कि बाइक टैक्सी वाणिज्यिक आधार पर काम करती है और व्यक्तिगत यात्रियों की सेवा करती है, न कि सामान्य जनता की, इसलिए यह सार्वजनिक परिवहन की परिभाषा से बाहर है।
चौथा पैराग्राफ: सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक निर्णय नहीं दिया है, परंतु यह दायर किया गया याचिका भारत में माइक्रोमोबिलिटी सेवाओं के विनियमन पर चल रही बहस में एक महत्वपूर्ण कदम है।