Local
करवाचौथ पर बुलंदशहर में पति‑पत्नी की मौत, परिवार में गहरा शोक
गजेंद्र सिंह पलावत और उनकी पत्नी कुसुम देवी की मौत से बुलंदशहर के गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
करवाचौथ के दिन बुलंदशहर जिले के तैयबपुर गांव में एक दुःखद घटना सामने आई। 60 वर्षीय पूर्व प्रधान और अधिवक्ता गजेंद्र सिंह पलावत दिल्ली के अस्पताल में इलाज के दौरान गुरुवार सुबह लगभग 8 बजे निधन हो गया। पत्नी कुसुम देवी को खबर सुनते ही मेरठ के अस्पताल में भर्ती कराया गया, पर गुरुवार रात साढ़े 8 बजे भी उन्होंने दम तोड़ दिया।
पति‑पत्नी की मौत से परिवार में मातम छा गया। 58 वर्षीय कुसुम देवी को गहरा सदमा लगा और परिजनों ने तुरंत उन्हें अस्पताल ले जाकर इलाज शुरू किया, पर हालत में सुधार नहीं हुआ। दोनों के अंतिम संस्कार गुरुवार शाम और शुक्रवार को क्रमशः गांव में और पति की चिता के पास बड़े रो‑रोकर शोक के साथ किये गये। इकलौते बेटे वेद चौधरी ने माता‑पिता को मुखाग्नि दी और ग्रामीण व परिचितों की बड़ी संख्या उपस्थित रही।
इसी दौरान कानपुर में भी करवाचौथ के दिन एक मजदूर की मौत हो गई। रनियां थाना क्षेत्र के चिराना सुभाष नगर निवासी 35 वर्षीय सत्येंद्र कुमार राठौर चिराना रोड स्थित एक खाद्य तेल फैक्ट्री में बॉयलर पर काम करते हुए पैर फिसलने से गहरे गड्ढे में गिर गए और गंभीर रूप से घायल हो गए। फैक्ट्री मालिक रमेश गुप्ता ने उन्हें कानपुर अस्पताल में उपचार के लिए भेजा, पर उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। सत्येंद्र की खबर मिलते ही उनके पिता श्रीराम, मां शांति, पत्नी रोशनी और बेटियां तान्या व पलक अस्पताल पहुंचीं।
दोनों घटनाओं ने अपने‑अपने समुदायों में गहरा शोक और संवेदना की लहर पैदा कर दी है।
पति‑पत्नी की मौत से परिवार में मातम छा गया। 58 वर्षीय कुसुम देवी को गहरा सदमा लगा और परिजनों ने तुरंत उन्हें अस्पताल ले जाकर इलाज शुरू किया, पर हालत में सुधार नहीं हुआ। दोनों के अंतिम संस्कार गुरुवार शाम और शुक्रवार को क्रमशः गांव में और पति की चिता के पास बड़े रो‑रोकर शोक के साथ किये गये। इकलौते बेटे वेद चौधरी ने माता‑पिता को मुखाग्नि दी और ग्रामीण व परिचितों की बड़ी संख्या उपस्थित रही।
इसी दौरान कानपुर में भी करवाचौथ के दिन एक मजदूर की मौत हो गई। रनियां थाना क्षेत्र के चिराना सुभाष नगर निवासी 35 वर्षीय सत्येंद्र कुमार राठौर चिराना रोड स्थित एक खाद्य तेल फैक्ट्री में बॉयलर पर काम करते हुए पैर फिसलने से गहरे गड्ढे में गिर गए और गंभीर रूप से घायल हो गए। फैक्ट्री मालिक रमेश गुप्ता ने उन्हें कानपुर अस्पताल में उपचार के लिए भेजा, पर उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। सत्येंद्र की खबर मिलते ही उनके पिता श्रीराम, मां शांति, पत्नी रोशनी और बेटियां तान्या व पलक अस्पताल पहुंचीं।
दोनों घटनाओं ने अपने‑अपने समुदायों में गहरा शोक और संवेदना की लहर पैदा कर दी है।