रक्षा
कर्ज वसूली के उत्पीड़न पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: डरे नहीं, आवाज उठाएं
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कर्जदार को परेशान करना या धमकाना गलत है। आर्थिक तंगी के कारण ईएमआई न चुका पाना अपराध नहीं है, बल्कि परिवार का भरण-पोषण पहले जरूरी है।
कर्ज के कारण किसी भी बैंक, रिकवरी एजेंट या सूदखोर द्वारा जबरन परेशान करने, प्रताड़ित करने या धमकी देने पर डरने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे में घबराकर कोई भी गलत कदम न उठाएं। यदि ऐसी कोई स्थिति उत्पन्न होती है, तो उसकी रिकॉर्डिंग या वीडियो रिकॉर्डिंग करें और शिकायत दर्ज कराएं। कर्ज लेना कोई अपराध नहीं है, और न ही आर्थिक स्थिति खराब होने पर ईएमआई या लोन न चुका पाना अपराध है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी इस संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। न्यायालय के अनुसार, ईएमआई या लोन चुकाने से ज्यादा जरूरी परिवार का भरण-पोषण करना है। इसलिए, कर्जदारों को खुद को अपराधी या दोषी नहीं मानना चाहिए। असली अपराधी वे हैं जो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि 13% सालाना दर से अधिक ब्याज दर पर अवैध तरीके से जबरन वसूली करना जुर्म और अपराध है। ऐसे में, संगठित होकर अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाना महत्वपूर्ण है। कर्ज मुक्ति अभियान का हिस्सा बनकर लोग अपनी समस्याओं का समाधान पा सकते हैं और उत्पीड़न से बच सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने भी इस संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। न्यायालय के अनुसार, ईएमआई या लोन चुकाने से ज्यादा जरूरी परिवार का भरण-पोषण करना है। इसलिए, कर्जदारों को खुद को अपराधी या दोषी नहीं मानना चाहिए। असली अपराधी वे हैं जो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि 13% सालाना दर से अधिक ब्याज दर पर अवैध तरीके से जबरन वसूली करना जुर्म और अपराध है। ऐसे में, संगठित होकर अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाना महत्वपूर्ण है। कर्ज मुक्ति अभियान का हिस्सा बनकर लोग अपनी समस्याओं का समाधान पा सकते हैं और उत्पीड़न से बच सकते हैं।