कानून से बचने के लिए पब्लिक का इस्तेमाल करना कोई नई बात नहीं है,
त्योहारों का सीजन, व्यापारियों का विरोध और चुनाव आयोग का हलफनामा... फिर भी 1 नवंबर को ही रैली की जिद क्यों?
पर्दे के पीछे का असली खेल समझिए! कांग्रेस हाईकमान की यह जिद कोई राजनीतिक शिष्टाचार नहीं है। यह कोई रैली नहीं, बल्कि 'नेशनल हेराल्ड' के जिन्न से डरे हुए लोगों का शक्ति प्रदर्शन (Pressure Tactics) है!
पूरे खेल की क्रोनोलॉजी समझिए:
🔹 पिछले साल दिसंबर में दिल्ली की निचली अदालत ने नेशनल हेराल्ड केस में ED की याचिका यह कहकर खारिज कर दी थी कि इस मामले में कोई FIR दर्ज नहीं है।
🔹 अगर ED हार मानकर बैठ जाती, तो यह मामला हमेशा के लिए वहीं दफन हो जाता। लेकिन ED ने फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दे दी और दिल्ली पुलिस ने भी इस मामले में FIR ठोक दी!
असली खौफ 2 नवंबर का है!
2 नवंबर को हाई कोर्ट में इस मामले की अहम सुनवाई है। कोर्ट यह तय करेगा कि ED की कार्रवाई आगे चलनी चाहिए या नहीं। कानूनी जानकारों के मुताबिक, पूरी संभावना है कि फैसला ED के पक्ष में आएगा और जांच की आंच सीधे शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचेगी।
यही है इस पूरी बेचैनी का असली कारण!
2 नवंबर के कानूनी हथौड़े से पहले 1 नवंबर को भीड़ तंत्र का दबाव बनाने की यह पूरी स्क्रिप्ट रची गई है। खौफ इतना है कि आजकल 'राजमाता' सोशल मीडिया पर अपनी प्रेम कहानियाँ सुना-सुनाकर डैमेज कंट्रोल और इमेज बिल्डिंग में लगी हैं, और 'युवराज' सड़क पर भीड़ जुटाकर अपनी ताकत दिखाने की छटपटाहट में हैं।
कानून से बचने के लिए पब्लिक का इस्तेमाल करना कोई नई बात नहीं है, लेकिन अब पब्लिक सब समझती है!
पर्दे के पीछे का असली खेल समझिए! कांग्रेस हाईकमान की यह जिद कोई राजनीतिक शिष्टाचार नहीं है। यह कोई रैली नहीं, बल्कि 'नेशनल हेराल्ड' के जिन्न से डरे हुए लोगों का शक्ति प्रदर्शन (Pressure Tactics) है!
पूरे खेल की क्रोनोलॉजी समझिए:
🔹 पिछले साल दिसंबर में दिल्ली की निचली अदालत ने नेशनल हेराल्ड केस में ED की याचिका यह कहकर खारिज कर दी थी कि इस मामले में कोई FIR दर्ज नहीं है।
🔹 अगर ED हार मानकर बैठ जाती, तो यह मामला हमेशा के लिए वहीं दफन हो जाता। लेकिन ED ने फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दे दी और दिल्ली पुलिस ने भी इस मामले में FIR ठोक दी!
असली खौफ 2 नवंबर का है!
2 नवंबर को हाई कोर्ट में इस मामले की अहम सुनवाई है। कोर्ट यह तय करेगा कि ED की कार्रवाई आगे चलनी चाहिए या नहीं। कानूनी जानकारों के मुताबिक, पूरी संभावना है कि फैसला ED के पक्ष में आएगा और जांच की आंच सीधे शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचेगी।
यही है इस पूरी बेचैनी का असली कारण!
2 नवंबर के कानूनी हथौड़े से पहले 1 नवंबर को भीड़ तंत्र का दबाव बनाने की यह पूरी स्क्रिप्ट रची गई है। खौफ इतना है कि आजकल 'राजमाता' सोशल मीडिया पर अपनी प्रेम कहानियाँ सुना-सुनाकर डैमेज कंट्रोल और इमेज बिल्डिंग में लगी हैं, और 'युवराज' सड़क पर भीड़ जुटाकर अपनी ताकत दिखाने की छटपटाहट में हैं।
कानून से बचने के लिए पब्लिक का इस्तेमाल करना कोई नई बात नहीं है, लेकिन अब पब्लिक सब समझती है!