📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Flashthomsom
अपराध
झारखंड हाई कोर्ट ने कहा 72 घंटे की मेडिकल देरी से यौन हमला पीड़िता के बयान में कमी नहीं
✍️ The New Indian Express
🗓 20 अक्टू. 2026, 01:47 AM
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झारखंड हाई कोर्ट ने कहा कि 72 घंटे तक की मेडिकल जांच में देरी से यौन हमला पीड़िता के बयान की विश्वसनीयता नहीं घटती।
झारखंड हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि यौन हमला के बाद 72 घंटे के भीतर की गई मेडिकल जांच से पीड़िता के बयान की विश्वसनीयता स्वतः कम नहीं होती। जबकि फोरेंसिक दिशा‑निर्देश शीघ्र जांच की सलाह देते हैं, कोर्ट ने कहा कि केवल समय का अंतर ही बयान को घटा नहीं सकता।
न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि किसी गवाह की विश्वसनीयता का आकलन संपूर्ण साक्ष्य के आधार पर होना चाहिए, न कि केवल मेडिकल रिपोर्ट के समय पर। यह निर्णय पीड़ितों को उन प्रक्रियात्मक देरी के लिए दण्डित न करने की नीति को सुदृढ़ करता है, जो उनके नियंत्रण से बाहर होती है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह राय सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेशों के अनुरूप है, जो फोरेंसिक परिणामों के साथ‑साथ पीड़िता के बयान को भी प्राथमिकता देता है। यह निर्णय राज्य भर में समान मामलों को संभालने वाले निचले अदालतों पर प्रभाव डाल सकता है।
कोर्ट ने पुलिस को शीघ्र मेडिकल सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया और साथ ही यह याद दिलाया कि प्रत्येक मामले का मूल्यांकन उसकी विशिष्ट परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए, जिससे प्रक्रिया की शुद्धता और पीड़िता के अधिकार दोनों सुरक्षित रहें।
न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि किसी गवाह की विश्वसनीयता का आकलन संपूर्ण साक्ष्य के आधार पर होना चाहिए, न कि केवल मेडिकल रिपोर्ट के समय पर। यह निर्णय पीड़ितों को उन प्रक्रियात्मक देरी के लिए दण्डित न करने की नीति को सुदृढ़ करता है, जो उनके नियंत्रण से बाहर होती है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह राय सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेशों के अनुरूप है, जो फोरेंसिक परिणामों के साथ‑साथ पीड़िता के बयान को भी प्राथमिकता देता है। यह निर्णय राज्य भर में समान मामलों को संभालने वाले निचले अदालतों पर प्रभाव डाल सकता है।
कोर्ट ने पुलिस को शीघ्र मेडिकल सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया और साथ ही यह याद दिलाया कि प्रत्येक मामले का मूल्यांकन उसकी विशिष्ट परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए, जिससे प्रक्रिया की शुद्धता और पीड़िता के अधिकार दोनों सुरक्षित रहें।