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झारखंड उच्च न्यायालय ने पति के क्रूरता के आरोप पर तलाक की याचिका अस्वीकार की
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Flashthomsom
अपराध

झारखंड उच्च न्यायालय ने पति के क्रूरता के आरोप पर तलाक की याचिका अस्वीकार की

✍️ The Indian Express 🗓 23 जुल. 2026, 04:04 PM 👁 52
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झारखंड उच्च न्यायालय ने पति द्वारा दायर तलाक की याचिका को अस्वीकार कर दिया, जिसने पत्नी को ‘अछूत’ कहा और बेटे को अस्वीकार किया, इसे क्रूरता के रूप में माना।

झारखंड उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक निर्णय में एक पति द्वारा दायर तलाक की याचिका को खारिज कर दिया, जिसने अपनी पत्नी को ‘अछूत’ कहा और बेटे को अस्वीकार किया था। यह याचिका पति के कथित क्रूर व्यवहार के आधार पर दायर की गई थी।

सुनवाई के दौरान, पति ने अपनी पत्नी के व्यवहार को अनैतिक बताते हुए मौखिक दुर्व्यवहार के सबूत पेश किए। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके बेटे को परिवार से बाहर कर दिया गया है, जिससे तलाक के लिए उनका तर्क मजबूत हुआ।

न्यायालय ने पाया कि प्रस्तुत सबूत भारतीय कानून के तहत तलाक के लिये आवश्यक क्रूरता के स्तर को स्थापित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे। न्यायालय ने यह भी बताया कि पति के बयान, हालांकि कठोर थे, लेकिन वे शारीरिक या मानसिक दुर्व्यवहार के रूप में नहीं गिने जा सकते।

अतः न्यायालय ने तलाक की याचिका को अस्वीकार कर दिया, जिससे वैवाहिक संबंध कानूनी रूप से वैध बना रहा। पति को वैकल्पिक विवाद समाधान के तरीकों की तलाश करने का निर्देश दिया गया।
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