📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Flashthomsom
शिक्षा
झारखंड हाई कोर्ट ने सरकारी स्कूलों की जाँच और त्वरित मरम्मत का आदेश दिया
✍️ India Today
🗓 09 अक्टू. 2026, 03:36 AM
👁 15
झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य के सभी सरकारी स्कूलों की व्यापक जाँच करने और असुरक्षित इन्फ्रास्ट्रक्चर को सुधारने के लिए त्वरित मरम्मत का आदेश दिया है।
रांची, झारखंड – झारखंड हाई कोर्ट ने हालिया आदेश में राज्य के सभी सरकारी स्कूलों का व्यापक सर्वेक्षण करवाने का निर्देश दिया है, जिससे कक्षाओं, शौचालयों और अन्य आवश्यक सुविधाओं की स्थिति का मूल्यांकन किया जा सके। कोर्ट ने छात्रों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए, शिक्षा विभाग को तुरंत इस जाँच को शुरू करने का आदेश दिया।
आदेश में उन सभी संरचनात्मक खामियों को दूर करने के लिए त्वरित मरम्मत का भी कहा गया है, जो छात्रों के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं, जैसे कि छत से रिसाव, टूटी खिड़कियां और खराब विद्युत वायरिंग। कोर्ट ने इन मरम्मत कार्यों को शीघ्रता से शुरू करने और आवश्यक फंड आवंटित करने की आवश्यकता पर बल दिया है।
शिक्षा विभाग को जाँच के परिणाम और मरम्मत की प्रगति का विस्तृत रिपोर्ट निर्धारित अवधि के भीतर कोर्ट को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। यह आदेश राज्य में सार्वजनिक स्कूलों के ढहते बुनियादी ढांचे को लेकर बढ़ती चिंताओं को दर्शाता है और बच्चों के लिए सुरक्षित शैक्षिक माहौल सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखता है।
शिक्षक संघों और अभिभावक समूहों ने इस न्यायिक हस्तक्षेप का स्वागत किया है, इसे झारखंड में सार्वजनिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए एक आवश्यक कदम बताया है। आदेश के कार्यान्वयन की निगरानी कोर्ट द्वारा करीबी तौर पर की जाएगी।
आदेश में उन सभी संरचनात्मक खामियों को दूर करने के लिए त्वरित मरम्मत का भी कहा गया है, जो छात्रों के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं, जैसे कि छत से रिसाव, टूटी खिड़कियां और खराब विद्युत वायरिंग। कोर्ट ने इन मरम्मत कार्यों को शीघ्रता से शुरू करने और आवश्यक फंड आवंटित करने की आवश्यकता पर बल दिया है।
शिक्षा विभाग को जाँच के परिणाम और मरम्मत की प्रगति का विस्तृत रिपोर्ट निर्धारित अवधि के भीतर कोर्ट को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। यह आदेश राज्य में सार्वजनिक स्कूलों के ढहते बुनियादी ढांचे को लेकर बढ़ती चिंताओं को दर्शाता है और बच्चों के लिए सुरक्षित शैक्षिक माहौल सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखता है।
शिक्षक संघों और अभिभावक समूहों ने इस न्यायिक हस्तक्षेप का स्वागत किया है, इसे झारखंड में सार्वजनिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए एक आवश्यक कदम बताया है। आदेश के कार्यान्वयन की निगरानी कोर्ट द्वारा करीबी तौर पर की जाएगी।