📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Flashthomsom
शिक्षा
झारखंड हाई कोर्ट ने कहा मेडिकल कॉलेज फीस को IPC धारा 406 के ‘एंट्रस्टमेंट’ नहीं माना जा सकता
✍️ Live Law
🗓 31 अग. 2026, 11:03 PM
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झारखंड हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि मेडिकल कॉलेज को दी गई फीस को IPC धारा 406 के एंट्रस्टमेंट के रूप में नहीं माना जा सकता।
झारखंड हाई कोर्ट की एक बेंच ने यह स्पष्ट किया कि छात्रों द्वारा मेडिकल कॉलेज को दी गई ट्यूशन या प्रवेश फीस को भारतीय दंड संहिता की धारा 406 के तहत "एंट्रस्टमेंट" नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि छात्र और शैक्षणिक संस्थान के बीच का संबंध अनुबंधात्मक है और यह किसी ट्रस्ट संबंध में नहीं बदलता, इसलिए आपराधिक विश्वासभंग की धारा लागू नहीं होती।
इस फैसले में यह भी बताया गया कि ऐसी फीस के दुरुपयोग के आरोपों को IPC धारा 406 के तहत नहीं, बल्कि उपयुक्त नागरिक या नियामक उपायों के माध्यम से ही सुलझाया जाना चाहिए। न्यायालय ने यह रुख अपनाया क्योंकि फीस लेन‑देन में संपत्ति का स्पष्ट ट्रस्ट संबंध नहीं बनता, जो कि धारा 406 के तहत आवश्यक है।
यह निर्णय उन मामलों में मार्गदर्शक होगा जहाँ छात्रों द्वारा फीस संबंधित विवादों को आपराधिक मुकदमे में लाया जाता है। कोर्ट ने कहा कि पेशेवर शिक्षा को नियंत्रित करने वाले विशेष नियम पहले से ही मौजूद हैं और उनसे ही शिकायतों का निपटारा होना चाहिए।
राज्य के प्राधिकरणों को मेडिकल कॉलेजों में फीस से जुड़ी समस्याओं को रोकने के लिए अनुपालन तंत्र को सुदृढ़ करने का निर्देश दिया गया है। इस फैसले से यह स्पष्ट हुआ कि जब तक तथ्यात्मक रूप से विश्वासभंग की शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक आपराधिक धाराओं का प्रयोग नहीं किया जा सकता।
सारांश में, झारखंड हाई कोर्ट ने IPC धारा 406 की सीमा को संकीर्ण किया है, जिससे यह केवल वास्तविक ट्रस्ट‑भंग मामलों में ही लागू होगी और शैक्षणिक संस्थानों में फीस विवादों के समाधान के लिए उचित नागरिक प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाएगी।
इस फैसले में यह भी बताया गया कि ऐसी फीस के दुरुपयोग के आरोपों को IPC धारा 406 के तहत नहीं, बल्कि उपयुक्त नागरिक या नियामक उपायों के माध्यम से ही सुलझाया जाना चाहिए। न्यायालय ने यह रुख अपनाया क्योंकि फीस लेन‑देन में संपत्ति का स्पष्ट ट्रस्ट संबंध नहीं बनता, जो कि धारा 406 के तहत आवश्यक है।
यह निर्णय उन मामलों में मार्गदर्शक होगा जहाँ छात्रों द्वारा फीस संबंधित विवादों को आपराधिक मुकदमे में लाया जाता है। कोर्ट ने कहा कि पेशेवर शिक्षा को नियंत्रित करने वाले विशेष नियम पहले से ही मौजूद हैं और उनसे ही शिकायतों का निपटारा होना चाहिए।
राज्य के प्राधिकरणों को मेडिकल कॉलेजों में फीस से जुड़ी समस्याओं को रोकने के लिए अनुपालन तंत्र को सुदृढ़ करने का निर्देश दिया गया है। इस फैसले से यह स्पष्ट हुआ कि जब तक तथ्यात्मक रूप से विश्वासभंग की शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक आपराधिक धाराओं का प्रयोग नहीं किया जा सकता।
सारांश में, झारखंड हाई कोर्ट ने IPC धारा 406 की सीमा को संकीर्ण किया है, जिससे यह केवल वास्तविक ट्रस्ट‑भंग मामलों में ही लागू होगी और शैक्षणिक संस्थानों में फीस विवादों के समाधान के लिए उचित नागरिक प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाएगी।