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09 अक्टू. 2026•
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शिक्षा

झारखंड सहायक आचार्य नियुक्ति मामला: JSSC भर्ती के प्रावधानों को हाईकोर्ट में चुनौती

✍️ रिपोर्टर: Rohit Kumar Yadav 🗓 09 अक्टू. 2026, 08:10 PM 👁 14
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झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की सहायक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में आरक्षण, चयन प्रक्रिया और न्यूनतम अर्हता अंकों जैसे प्रावधानों पर आपत्ति जताई गई है।

रांची: झारखंड में शिक्षक भर्ती का मामला एक बार फिर अदालत की दहलीज पर पहुँच गया है। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा जारी सहायक आचार्य नियुक्ति (विज्ञापन संख्या 04/2026) के कुछ प्रमुख प्रावधानों को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। राम प्रकाश यादव एवं अन्य पारा शिक्षकों द्वारा दायर इस याचिका में भर्ती के नियमों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

याचिका में मुख्य रूप से आरक्षण के प्रावधानों, अनारक्षित पदों पर चयन प्रक्रिया की शर्तों और न्यूनतम अर्हता अंकों से जुड़े नियमों पर आपत्ति दर्ज कराई गई है। याचिकाकर्ताओं ने विज्ञापन की उस शर्त को भी चुनौती दी है जिसके तहत आरक्षित श्रेणी के अंकों के आधार पर जेटेट (JTET) या अन्य टीईटी परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों को केवल आरक्षित वर्ग के पदों के लिए ही पात्र माना जा रहा है। याचिकाकर्ताओं का आग्रह है कि इन विवादित शर्तों को रद्द कर पात्र अभ्यर्थियों को मेरिट के आधार पर अनारक्षित पदों पर भी अवसर प्रदान किया जाए।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि मेरिट में आने वाले योग्य अभ्यर्थियों को अनारक्षित पदों के चयन से बाहर रखना अनुचित है, खासकर तब जब संबंधित आरक्षित वर्गों में रिक्तियां शून्य (0) दर्शाई गई हों। उदाहरण के तौर पर, कक्षा 1 से 5 के लिए इंटरमीडिएट प्रशिक्षित सहायक आचार्य के 1,909 पदों और स्नातक प्रशिक्षित (सामाजिक विज्ञान) के 660 नियमित पदों पर अत्यंत पिछड़ा वर्ग-I (EBC-I) और पिछड़ा वर्ग-II (BC-II) के लिए रिक्तियों की संख्या शून्य बताई गई है।

याचिका में मांग की गई है कि इन वर्गों के लिए शून्य पद निर्धारित करने के आधार को स्पष्ट किया जाए। साथ ही, इसके लिए मूल आरक्षण रोस्टर तथा पूर्व नियुक्तियों का श्रेणीवार ब्योरा अदालत के समक्ष पेश किया जाए। यह मामला राज्य में शिक्षक भर्ती की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है।
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