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जय अंबे कंपनी की कथित तानाशाही के खिलाफ ग्रामीणों का जोरदार आंदोलन, 8 घंटे से काम बंद संवाददाता अखिलेश त्रिपाठी अनूपपुर
जय अंबे कंपनी की कथित तानाशाही के खिलाफ ग्रामीणों का जोरदार आंदोलन, 8 घंटे से काम बंद संवाददाता अखिलेश त्रिपाठी अनूपपुर
जय अंबे कंपनी की कथित तानाशाही के खिलाफ ग्रामीणों का जोरदार आंदोलन, 8 घंटे से काम बंद
संवाददाता अखिलेश त्रिपाठी
अनूपपुर शहडोल
बाहरी लोगों की भर्ती और स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता नहीं देने का आरोप, खबर लिखे जाने तक मौके पर नहीं पहुंचे अधिकारी
रामपुर बटुरा। रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट में कार्यरत जय अंबे प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। कंपनी की कथित मनमानी, बाहरी लोगों की भर्ती और स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता नहीं देने के आरोपों को लेकर ग्रामीणों ने जोरदार आंदोलन किया। आंदोलन के चलते परियोजना क्षेत्र में पिछले करीब 8 घंटे से कामकाज बंद होने की जानकारी सामने आई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी ने शुरुआत में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब बाहरी लोगों को भर्ती किया जा रहा है और स्थानीय बेरोजगार युवाओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। कई स्थानीय युवाओं द्वारा ट्रायल देने के बावजूद उन्हें नौकरी नहीं मिली है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता दी जाए और भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जाए। उनका कहना है कि जिस क्षेत्र में परियोजना संचालित हो रही है, वहां के लोगों को ही रोजगार के लिए भटकना पड़ रहा है।
सबसे हैरानी की बात यह है कि आठ घंटे से काम बंद रहने के बावजूद खबर लिखे जाने तक कंपनी या SECL का कोई जिम्मेदार अधिकारी आंदोलन स्थल पर ग्रामीणों से बातचीत करने नहीं पहुंचा था।
अब सवाल यह है कि कंपनी प्रबंधन कब ग्रामीणों की समस्याएं सुनेगा और स्थानीय बेरोजगारों को उनका अधिकार कब मिलेगा?
संवाददाता अखिलेश त्रिपाठी
अनूपपुर शहडोल
बाहरी लोगों की भर्ती और स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता नहीं देने का आरोप, खबर लिखे जाने तक मौके पर नहीं पहुंचे अधिकारी
रामपुर बटुरा। रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट में कार्यरत जय अंबे प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। कंपनी की कथित मनमानी, बाहरी लोगों की भर्ती और स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता नहीं देने के आरोपों को लेकर ग्रामीणों ने जोरदार आंदोलन किया। आंदोलन के चलते परियोजना क्षेत्र में पिछले करीब 8 घंटे से कामकाज बंद होने की जानकारी सामने आई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी ने शुरुआत में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब बाहरी लोगों को भर्ती किया जा रहा है और स्थानीय बेरोजगार युवाओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। कई स्थानीय युवाओं द्वारा ट्रायल देने के बावजूद उन्हें नौकरी नहीं मिली है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता दी जाए और भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जाए। उनका कहना है कि जिस क्षेत्र में परियोजना संचालित हो रही है, वहां के लोगों को ही रोजगार के लिए भटकना पड़ रहा है।
सबसे हैरानी की बात यह है कि आठ घंटे से काम बंद रहने के बावजूद खबर लिखे जाने तक कंपनी या SECL का कोई जिम्मेदार अधिकारी आंदोलन स्थल पर ग्रामीणों से बातचीत करने नहीं पहुंचा था।
अब सवाल यह है कि कंपनी प्रबंधन कब ग्रामीणों की समस्याएं सुनेगा और स्थानीय बेरोजगारों को उनका अधिकार कब मिलेगा?