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31 अक्टू. 2026•
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जनदर्शन पोर्टल का हवाला, लेकिन कार्रवाई का रिकॉर्ड गायब! दो शिक्षाकर्मियों की डिग्री जांच पर उठे सवाल*

✍️ रिपोर्टर: Mukesh Yadav 🗓 31 अक्टू. 2026, 06:57 PM 👁 163
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CM हेल्पलाइन और जनशिकायत में भी शिकायतों के निराकरण पर सवाल, RTI के जवाब से असंतुष्ट शिकायतकर्ता करेंगे प्रथम अपील; अब राज्यपाल से नियुक्तिकर्ता अधिकारियों से लेकर जांच अधिकारियों तक की भूमिका की जांच कराने की मांग।

कोरिया/एमसीबी। तत्कालीन अविभाजित कोरिया जिले में दो शिक्षाकर्मियों की नियुक्ति एवं उनकी शैक्षणिक डिग्रियों की प्रमाणिकता को लेकर उठे सवाल अब प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा बनते जा रहे हैं। कथित फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के आधार पर शासकीय नौकरी प्राप्त करने की आशंका को लेकर की गई शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए शिकायतकर्ता ने अब राज्यपाल के समक्ष मामला उठाने की तैयारी की है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में केवल संबंधित शिक्षाकर्मियों की डिग्रियों की ही नहीं, बल्कि नियुक्ति प्रक्रिया और शिकायतों की जांच करने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

मामला तत्कालीन अविभाजित कोरिया जिले के दो शिक्षाकर्मियों प्रेमलाल सोनवानी, पिता जमुना प्रसाद तथा श्रीमती रेखा, पति रामनारायण से संबंधित है। शिकायतकर्ता प्रिंसु पांडेय द्वारा दोनों शिक्षाकर्मियों की नियुक्ति एवं शैक्षणिक दस्तावेजों की प्रमाणिकता को लेकर संबंधित विभागों से जानकारी और जांच की मांग की जा रही है।

CM हेल्पलाइन और जनशिकायत में भी उठाया था मामला

शिकायतकर्ता के अनुसार, दोनों शिक्षाकर्मियों की नियुक्ति एवं शैक्षणिक योग्यता से संबंधित मामले को लेकर पूर्व में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और जनशिकायत के माध्यम से भी शिकायत प्रस्तुत की गई थी। आरोप है कि शिकायतों का बिना समुचित जांच और आवश्यक दस्तावेजों के परीक्षण के निराकरण कर दिया गया।

शिकायतकर्ता का सवाल है कि जब मामला शासकीय नियुक्ति और शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की वैधता से जुड़ा है, तो संबंधित विश्वविद्यालय अथवा बोर्ड से प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराए बिना शिकायतों का निराकरण किस आधार पर किया गया? यदि जांच की गई थी तो उसका प्रतिवेदन और कार्रवाई का विवरण सामने क्यों नहीं आया?

RTI के तहत मांगी 17 बिंदुओं पर जानकारी

मामले में प्रिंसु पांडेय ने 15 सितंबर 2026 को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 6(1) के तहत आवेदन प्रस्तुत कर दोनों शिक्षाकर्मियों से संबंधित 17 बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी।

इसमें नियुक्ति आदेशों की प्रमाणित प्रतियां, नियुक्ति के समय प्रस्तुत शैक्षणिक दस्तावेज, B.Ed./D.Ed. प्रमाणपत्रों का संबंधित विश्वविद्यालय अथवा बोर्ड से सत्यापन, सत्यापन रिपोर्ट, शिकायत पर की गई जांच, जांच अधिकारी की नियुक्ति, जांच प्रतिवेदन तथा संबंधित अधिकारियों के बीच हुए पत्राचार की जानकारी शामिल थी।

इसके अलावा यह भी पूछा गया था कि संबंधित शिक्षाकर्मियों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन किस स्तर पर कराया गया और यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आई तो संबंधित विभाग द्वारा क्या कार्रवाई की गई?

7 अक्टूबर को कलेक्टर कार्यालय से मिला जवाब

कार्यालय कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी, जिला मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर की ओर से 7 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में मांगी गई जानकारी के संबंध में जनदर्शन पोर्टल का हवाला दिया गया।

जवाब में 28 जनवरी 2014 के आदेश का उल्लेख करते हुए वेबसाइट पर सूचना के प्रकटीकरण को आवेदक एवं लोक प्राधिकारी के समय और श्रम की बचत से जोड़ते हुए ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी प्राप्त करने की बात कही गई।

हालांकि शिकायतकर्ता द्वारा मांगी गई जानकारी केवल शिकायत की वर्तमान स्थिति तक सीमित नहीं थी। इसमें नियुक्ति आदेश, विश्वविद्यालय से डिग्री सत्यापन, जांच प्रतिवेदन, संबंधित अधिकारियों के पत्राचार और कार्रवाई से जुड़े शासकीय अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां भी मांगी गई थीं।

वेबसाइट पर कार्रवाई का रिकॉर्ड कहां?

कलेक्टर कार्यालय के जवाब के बाद अब जनदर्शन पोर्टल की उपलब्ध जानकारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि संबंधित वेबसाइट पर इस प्रकरण की जांच रिपोर्ट, कार्रवाई का विवरण अथवा शिकायत के निराकरण को प्रमाणित करने वाले दस्तावेज अपलोड नहीं हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि जब आवेदक ने संबंधित अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं, तो उन्हें उपलब्ध कराने के बजाय केवल पोर्टल का हवाला क्यों दिया गया?

यदि शिकायत की जांच पूरी हो चुकी है तो जांच प्रतिवेदन और कार्रवाई का विवरण उपलब्ध कराया जाना चाहिए। वहीं यदि जांच नहीं हुई है तो शिकायत के निराकरण का आधार स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।

अब प्रथम अपील करेंगे शिकायतकर्ता

RTI के जवाब से असंतुष्ट प्रिंसु पांडेय ने कहा कि सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी के स्थान पर जनदर्शन पोर्टल का हवाला दिया गया है, जबकि पोर्टल पर संबंधित मामले की कार्रवाई का कोई विवरण उपलब्ध नहीं है।

उन्होंने बताया कि इस जवाब के विरुद्ध प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष प्रथम अपील प्रस्तुत की जाएगी। अपील में मांगी गई जानकारी के प्रत्येक बिंदु पर स्पष्ट जवाब और उपलब्ध शासकीय अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की जाएगी।

अब राज्यपाल से होगी शिकायत, अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग

शिकायतकर्ता ने बताया कि पूर्व में CM हेल्पलाइन और जनशिकायत के माध्यम से भी मामला उठाया गया था, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण अब राज्यपाल के समक्ष विस्तृत शिकायत प्रस्तुत करने की तैयारी है।

प्रस्तावित शिकायत में संबंधित दोनों शिक्षाकर्मियों की नियुक्ति, शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की प्रमाणिकता एवं विश्वविद्यालय से सत्यापन की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की जाएगी। इसके साथ ही नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल तत्कालीन नियुक्तिकर्ता अधिकारियों, शिकायतों की जांच करने वाले अधिकारियों तथा बिना समुचित जांच के शिकायतों का निराकरण करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग उठाई जाएगी।

शिकायतकर्ता का कहना है कि जांच ऐसी एजेंसी अथवा सक्षम अधिकारी से कराई जानी चाहिए, जो पूर्व में इस मामले से जुड़े अधिकारियों के प्रभाव से स्वतंत्र हो, ताकि वास्तविक तथ्यों का निष्पक्ष परीक्षण हो सके।

कई सवालों के जवाब अब भी बाकी

इस पूरे मामले में कुछ महत्वपूर्ण सवाल अब भी अनुत्तरित हैं—

- क्या दोनों शिक्षाकर्मियों के B.Ed./D.Ed. प्रमाणपत्रों का संबंधित विश्वविद्यालय अथवा बोर्ड से सत्यापन कराया गया?
- यदि सत्यापन हुआ तो उसकी रिपोर्ट कहां है?
- नियुक्ति के समय प्रस्तुत शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच किस अधिकारी ने की?
- नियुक्ति आदेश किस सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किए गए थे?
- शिकायतों की जांच किस अधिकारी को सौंपी गई थी?
- जांच प्रतिवेदन में क्या निष्कर्ष सामने आए?
- CM हेल्पलाइन और जनशिकायत में शिकायतों का निराकरण किन दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर किया गया?
- RTI के तहत मांगे गए प्रमाणित अभिलेख उपलब्ध कराने के बजाय जनदर्शन पोर्टल का हवाला क्यों दिया गया?

फिलहाल इस प्रकरण में संबंधित दोनों शिक्षाकर्मियों की डिग्रियों की वैधता पर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में विश्वविद्यालय से दस्तावेजों का सत्यापन और नियुक्ति संबंधी अभिलेखों की निष्पक्ष जांच ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर सकती है। अब देखना होगा कि प्रथम अपील और राज्यपाल के समक्ष प्रस्तावित शिकायत के बाद प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।
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