📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / UnpetitproleX
सरकारी योजना
जम्मू-कश्मीर ने जनवरी से 56,664 रेशन लाभार्थियों को हटाया, 2.25 लाख नए नाम जोड़े
✍️ Kashmir Life
🗓 01 अक्टू. 2026, 05:37 AM
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जम्मू-कश्मीर सरकार ने बताया कि जनवरी से 56,664 रेशन कार्डधारकों को सूची से हटाया गया, जबकि 2.25 लाख नए परिवारों को जोड़ा गया।
जम्मू-कश्मीर सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में कुल लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि की घोषणा की है। जनवरी से, सत्यापन प्रक्रिया के बाद 56,664 मौजूदा रेशन कार्डधारकों को डेटाबेस से हटाया गया, अधिकारियों ने बताया।
साथ ही, 2.25 लाख नए परिवारों को रेशन सूची में शामिल किया गया, जिससे अधिक लोगों को अनाज और आवश्यक वस्तुओं की सब्सिडी मिल सके। यह कदम पीडीएस सूची को अद्यतन करने और लाभार्थियों तक सही सहायता पहुँचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
हटाए गए नाम डुप्लिकेट एंट्री, अयोग्य आवेदकों और प्रवास संबंधी बदलावों के कारण थे, जबकि नए नाम ताज़ा आवेदन और फील्ड वेरिफिकेशन के आधार पर जोड़े गए। सरकार का लक्ष्य योजना की दक्षता बढ़ाना और लीकेज को कम करना है।
इन आंकड़ों को राज्य के खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों विभाग ने एक प्रेस विज्ञप्ति में उजागर किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि बड़े पैमाने पर हटाने के बावजूद कुल लाभार्थी संख्या में वृद्धि हुई है।
सरकार ने निवासियों से अनुरोध किया है कि वे ऑनलाइन अपने रेशन कार्ड की स्थिति जांचें और किसी भी त्रुटि की सूचना स्थानीय अधिकारियों को दें, ताकि वितरण प्रणाली की पारदर्शिता बनी रहे।
साथ ही, 2.25 लाख नए परिवारों को रेशन सूची में शामिल किया गया, जिससे अधिक लोगों को अनाज और आवश्यक वस्तुओं की सब्सिडी मिल सके। यह कदम पीडीएस सूची को अद्यतन करने और लाभार्थियों तक सही सहायता पहुँचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
हटाए गए नाम डुप्लिकेट एंट्री, अयोग्य आवेदकों और प्रवास संबंधी बदलावों के कारण थे, जबकि नए नाम ताज़ा आवेदन और फील्ड वेरिफिकेशन के आधार पर जोड़े गए। सरकार का लक्ष्य योजना की दक्षता बढ़ाना और लीकेज को कम करना है।
इन आंकड़ों को राज्य के खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों विभाग ने एक प्रेस विज्ञप्ति में उजागर किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि बड़े पैमाने पर हटाने के बावजूद कुल लाभार्थी संख्या में वृद्धि हुई है।
सरकार ने निवासियों से अनुरोध किया है कि वे ऑनलाइन अपने रेशन कार्ड की स्थिति जांचें और किसी भी त्रुटि की सूचना स्थानीय अधिकारियों को दें, ताकि वितरण प्रणाली की पारदर्शिता बनी रहे।