📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ramchandra9
राजनीति
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में स्पीकर हटाने की मांग के बीच सत्र की शुरुआत
✍️ Kashmir Life
🗓 29 सित. 2026, 02:02 PM
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने आज सत्र शुरू किया, पर स्पीकर को हटाने की मांग पर तीव्र विरोध हुआ।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने राजधानी में अपना सत्र आज शुरू किया, जहाँ विधायकों ने स्पीकर को हटाने की मांग के साथ तीव्र विरोध प्रदर्शित किया। विपक्षी दलों और कई प्रतिनिधियों ने नारे लगाए तथा सत्र के दौरान मंच से बाहर निकलते हुए स्पीकर के पद से हटाने की माँग दोहराई।
स्पीकर के हटाने की माँग का आधार यह आरोप है कि वर्तमान अध्यक्ष ने कार्यवाही में पक्षपात दिखाया है, जिससे बहस और विधेयकों की पारित प्रक्रिया प्रभावित हुई है। स्पीकर ने अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, जबकि नियमों के अनुसार हटाने के लिए औपचारिक प्रस्ताव और बहुमत की आवश्यकता होती है।
विरोध के बावजूद, विधानसभा ने अपने कार्यसूची के तहत बकाया विधेयकों और क्षेत्रीय विकास मुद्दों पर चर्चा जारी रखी। सभा परिसर में व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है और सत्र निकट भविष्य में भी कड़ी निगरानी के तहत चलता रहेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद राज्य की विधायी ढांचे में व्यापक तनाव को दर्शाता है, विशेषकर हालिया संवैधानिक परिवर्तनों के बाद। स्पीकर के खिलाफ किसी भी प्रस्ताव का परिणाम भविष्य में जम्मू-कश्मीर में संसद के संचालन के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है।
विधानसभा कल फिर से सत्र जारी रखेगी, जहाँ सरकार और विपक्ष दोनों ने पार्लियामेंटरी प्रक्रियाओं के माध्यम से समाधान खोजने का इरादा जताया है, न कि सड़कों पर प्रदर्शनों से।
स्पीकर के हटाने की माँग का आधार यह आरोप है कि वर्तमान अध्यक्ष ने कार्यवाही में पक्षपात दिखाया है, जिससे बहस और विधेयकों की पारित प्रक्रिया प्रभावित हुई है। स्पीकर ने अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, जबकि नियमों के अनुसार हटाने के लिए औपचारिक प्रस्ताव और बहुमत की आवश्यकता होती है।
विरोध के बावजूद, विधानसभा ने अपने कार्यसूची के तहत बकाया विधेयकों और क्षेत्रीय विकास मुद्दों पर चर्चा जारी रखी। सभा परिसर में व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है और सत्र निकट भविष्य में भी कड़ी निगरानी के तहत चलता रहेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद राज्य की विधायी ढांचे में व्यापक तनाव को दर्शाता है, विशेषकर हालिया संवैधानिक परिवर्तनों के बाद। स्पीकर के खिलाफ किसी भी प्रस्ताव का परिणाम भविष्य में जम्मू-कश्मीर में संसद के संचालन के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है।
विधानसभा कल फिर से सत्र जारी रखेगी, जहाँ सरकार और विपक्ष दोनों ने पार्लियामेंटरी प्रक्रियाओं के माध्यम से समाधान खोजने का इरादा जताया है, न कि सड़कों पर प्रदर्शनों से।