जिम केवल बाह्य स्वरूप को निखारता है, जबकि योग और प्राणायाम से शरीर की आंतरिक ग्रंथियों की शुद्धि होती है और शरीर भीतर से मजबूत बनता है।
यहाँ देखें:
📘 Facebook
कच्छ जिले के की मुंद्रा तहसील के विराणीया गांव के प्राथमिक विद्यालय के सामान्य कक्ष में रात्रि विश्राम के पश्चात प्रातःकाल विद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं ग्रामवासियों के साथ योगाभ्यास किया तथा योगासन, प्राणायाम और ध्यान के शारीरिक एवं मानसिक लाभों से सभी को अवगत कराया।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मोबाइल की लत के कारण लोग घंटों एक ही स्थिति में बैठे रहते हैं, जिससे शरीर में रक्त संचार प्रभावित होता है। ऐसी स्थिति में प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रतिदिन योग-प्राणायाम हेतु समय निकालना अत्यंत आवश्यक है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के प्रयासों से भारत की प्राचीन योग विरासत को आज पूरे विश्व में अभूतपूर्व पहचान और सम्मान मिला है।
जिम केवल बाह्य स्वरूप को निखारता है, जबकि योग और प्राणायाम से शरीर की आंतरिक ग्रंथियों की शुद्धि होती है और शरीर भीतर से मजबूत बनता है।
कपालभाति, अनुलोम-विलोम और भस्त्रिका प्राणायाम के नियमित अभ्यास से श्वसन तंत्र शक्तिशाली बनता है, मानसिक तनाव दूर होता है और विद्यार्थियों में एकाग्रता बढ़ती है।
विद्यार्थियों को उत्तम पुस्तकें पढ़ने की आदत डालने तथा जीवन में कभी कोई भूल होने पर उसे अपने माता-पिता या गुरुजनों से न छिपाकर सहजता से स्वीकार करने की प्रेरणा दी। योग और प्राणायाम को अपनी दैनिक जीवनशैली का स्थायी अंग बनाने सभी को રાજ્યપાલ શ્રી આચાર્ય દેવવ્રતજીએ आह्वान किया।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मोबाइल की लत के कारण लोग घंटों एक ही स्थिति में बैठे रहते हैं, जिससे शरीर में रक्त संचार प्रभावित होता है। ऐसी स्थिति में प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रतिदिन योग-प्राणायाम हेतु समय निकालना अत्यंत आवश्यक है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के प्रयासों से भारत की प्राचीन योग विरासत को आज पूरे विश्व में अभूतपूर्व पहचान और सम्मान मिला है।
जिम केवल बाह्य स्वरूप को निखारता है, जबकि योग और प्राणायाम से शरीर की आंतरिक ग्रंथियों की शुद्धि होती है और शरीर भीतर से मजबूत बनता है।
कपालभाति, अनुलोम-विलोम और भस्त्रिका प्राणायाम के नियमित अभ्यास से श्वसन तंत्र शक्तिशाली बनता है, मानसिक तनाव दूर होता है और विद्यार्थियों में एकाग्रता बढ़ती है।
विद्यार्थियों को उत्तम पुस्तकें पढ़ने की आदत डालने तथा जीवन में कभी कोई भूल होने पर उसे अपने माता-पिता या गुरुजनों से न छिपाकर सहजता से स्वीकार करने की प्रेरणा दी। योग और प्राणायाम को अपनी दैनिक जीवनशैली का स्थायी अंग बनाने सभी को રાજ્યપાલ શ્રી આચાર્ય દેવવ્રતજીએ आह्वान किया।