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25 Oct 2026•
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इंदौर में साल 2018–19 के दौरान शहर के बड़े डंप यार्ड पर जमा लगभग 13 लाख टन पुराने कचरे को प्रोसेस कर साफ किया गया

✍️ Reporter: Ajaruddin 🗓 25 Oct 2026, 01:24 AM 👁 42
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इंदौर में साल 2018–19 के दौरान शहर के बड़े डंप यार्ड पर जमा लगभग

इंदौर में साल 2018–19 के दौरान शहर के बड़े डंप यार्ड पर जमा लगभग 13 लाख टन पुराने कचरे को प्रोसेस कर साफ किया गया।

उस समय नगर निगम में जिम्मेदारी संभाल रहे IAS अधिकारी आशीष सिंह के नेतृत्व में यह काम करीब छह महीनों में पूरा हुआ। यह कचरा सीधे किसी दूसरी जगह फेंका नहीं गया, बल्कि वैज्ञानिक तरीके से “बायो-रिमेडिएशन और बायो-माइनिंग” प्रक्रिया से गुजारा गया।

गीले कचरे को प्रोसेस कर खाद जैसी उपयोगी सामग्री में बदला गया। सूखे कचरे में से प्लास्टिक, धातु और अन्य रिसाइक्लेबल चीज़ों को अलग कर डीलर्स को भेजा गया। कम गुणवत्ता वाले प्लास्टिक और ज्वलनशील कचरे को RDF (Refuse Derived Fuel) बनाकर सीमेंट फैक्ट्रियों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया गया।

पॉलीथिन और अन्य अवशेष सड़क निर्माण और औद्योगिक उपयोग में लगाए गए। इस तरह कचरे का बड़ा हिस्सा दोबारा उपयोग में आया और केवल बहुत कम अनुपयोगी अवशेष ही सुरक्षित तरीके से निस्तारित किए गए।

इस मॉडल से लगभग 65 करोड़ रुपये के संभावित आउटसोर्सिंग खर्च की बचत हुई। कचरा हटने के बाद करीब 100 एकड़ जमीन खाली हुई, जिस पर गार्डन और सिटी फॉरेस्ट विकसित करने की योजना बनाई गई। यह पहल सिर्फ सफाई अभियान नहीं थी, बल्कि “कचरे से संसाधन” बनाने का व्यावहारिक और टिकाऊ उदाहरण भी बनी, जिसने इंदौर को स्वच्छता के क्षेत्र में नई पहचान दि
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