Religion
इंदौर में गोस्वामी 108 श्री दिव्येशकुमारजी महाराज के सान्निध्य में भव्य रासोत्सव आयोजित
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25 अक्टूबर को इंदौर के कीमती गार्डन में वैष्णव समाज के विभिन्न वर्गों ने गोस्वामी 108 श्री दिव्येशकुमारजी महाराज के पावन सान्निध्य में पारम्परिक वेशभूषा में रासोत्सव का आयोजन किया।
इंदौर नगर में 25 अक्टूबर को वैष्णव संस्कृति की दिव्य आभा अपने चरम पर पहुँची, जब कीमती गार्डन में परम पूज्यपाद गोस्वामी 108 श्री दिव्येशकुमारजी महाराज के पावन सान्निध्य में भव्य रासोत्सव का आयोजन हुआ। इस अवसर पर नागर, नीमा, सोनी, पोरवाल समाज के प्रतिनिधि पारम्परिक वस्त्रधारण में एकत्रित हुए।
समारोह का शुभारम्भ मंगल दीप प्रज्वलन से हुआ। महाराज के आगमन पर पुष्प वर्षा और आतिशबाजी ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। लाल‑श्वेत वस्त्रों से सज्जित गलियारे से महाराज श्री मंच पर प्रवेश करने पर उपस्थित जनसमुदाय ने करताल ध्वनि से उनका अभिनंदन किया। मंच से महाराजश्री ने आध्यात्मिक प्रवचन दिया और पुष्टिमार्ग के मूल सिद्धान्त को सरल शब्दों में समझाया। इसके बाद श्री यमुनाजी की भव्य महा‑आरती सम्पन्न हुई तथा पूनम नागर ने दिव्य पुष्टि विद्यापीठ का परिचय कराया, जिसका उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ना है।
रास‑मंडप में रासेश्वरी ग्रुप सहित सोनी, नागर, नीमा समाज की महिलाओं एवं बालिकाओं ने जीवंत गरबा‑रास प्रस्तुत किया। विशाल पंडाल में बाल कलाकारों ने लाठी‑रास, मणियारो रास तथा ब्रज की फूल होली का सजीव चित्रण किया। 'रंग भीनी राधा' जैसे पुष्टिमार्गीय भजनों पर सैकड़ों वैष्णव एक साथ गोलाकार में नाचते हुए कीमती गार्डन को वृंदावन धाम समान बना दिया।
प्रसिद्ध कोरियोग्राफर मोहित मेहता निर्णायक के रूप में उपस्थित रहे और उत्कृष्ट गरबा, सर्वश्रेष्ठ वेशभूषा, सर्वश्रेष्ठ बाल, पुरुष, महिला एवं युगल गरबा के लिए पुरस्कार प्रदान किए गए। कार्यक्रम का संचालन संजय नगर ने पारम्परिक पुष्टिमार्ग शैली में किया।
समारोह के अंतिम चरण में सभी श्रद्धालुओं ने खुले रास में भाग लेकर राधा‑कृष्ण के प्रेमोत्सव को हृदयंगम किया और सामूहिक चित्र के साथ इस दिव्य रात्रि को स्मृति‑पटल पर अंकित किया। इस भव्य आयोजन ने उपस्थित प्रत्येक जन के हृदय में ब्रज संस्कृति और पुष्टि मार्ग की अमिट छाप छोड़ी।
समारोह का शुभारम्भ मंगल दीप प्रज्वलन से हुआ। महाराज के आगमन पर पुष्प वर्षा और आतिशबाजी ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। लाल‑श्वेत वस्त्रों से सज्जित गलियारे से महाराज श्री मंच पर प्रवेश करने पर उपस्थित जनसमुदाय ने करताल ध्वनि से उनका अभिनंदन किया। मंच से महाराजश्री ने आध्यात्मिक प्रवचन दिया और पुष्टिमार्ग के मूल सिद्धान्त को सरल शब्दों में समझाया। इसके बाद श्री यमुनाजी की भव्य महा‑आरती सम्पन्न हुई तथा पूनम नागर ने दिव्य पुष्टि विद्यापीठ का परिचय कराया, जिसका उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ना है।
रास‑मंडप में रासेश्वरी ग्रुप सहित सोनी, नागर, नीमा समाज की महिलाओं एवं बालिकाओं ने जीवंत गरबा‑रास प्रस्तुत किया। विशाल पंडाल में बाल कलाकारों ने लाठी‑रास, मणियारो रास तथा ब्रज की फूल होली का सजीव चित्रण किया। 'रंग भीनी राधा' जैसे पुष्टिमार्गीय भजनों पर सैकड़ों वैष्णव एक साथ गोलाकार में नाचते हुए कीमती गार्डन को वृंदावन धाम समान बना दिया।
प्रसिद्ध कोरियोग्राफर मोहित मेहता निर्णायक के रूप में उपस्थित रहे और उत्कृष्ट गरबा, सर्वश्रेष्ठ वेशभूषा, सर्वश्रेष्ठ बाल, पुरुष, महिला एवं युगल गरबा के लिए पुरस्कार प्रदान किए गए। कार्यक्रम का संचालन संजय नगर ने पारम्परिक पुष्टिमार्ग शैली में किया।
समारोह के अंतिम चरण में सभी श्रद्धालुओं ने खुले रास में भाग लेकर राधा‑कृष्ण के प्रेमोत्सव को हृदयंगम किया और सामूहिक चित्र के साथ इस दिव्य रात्रि को स्मृति‑पटल पर अंकित किया। इस भव्य आयोजन ने उपस्थित प्रत्येक जन के हृदय में ब्रज संस्कृति और पुष्टि मार्ग की अमिट छाप छोड़ी।