📷 चित्र स्रोत: Times of India (via NewsData)
रक्षा
ईरान की IRGC ने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में दूसरा अमेरिकी किंगफ़िश ड्रोन जब्त किया
✍️ Times of India
🗓 28 सित. 2026, 06:13 AM
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ईरान की इस्लामी क्रांतिकारी गार्ड ने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में दूसरा अमेरिकी Mk‑18 Mod 2 किंगफ़िश ड्रोन जब्त करने की पुष्टि की, जिससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ा।
ईरानी इस्लामी क्रांतिकारी गार्ड (IRGC) ने गुरुवार को बताया कि उसने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में स्थित अपने जलक्षेत्र में अमेरिकी Mk‑18 Mod 2 "Kingfish" अनमैन्ड अंडरवाटर ड्रोन को पकड़ लिया। इस बयान के अनुसार, ड्रोन को नियमित गश्त के दौरान पहचाना गया और फिर जब्त किया गया।
यह घटना पिछले साल इसी जलमार्ग में अमेरिकी ड्रोन को जब्त करने के दावे के बाद की दूसरी रिपोर्ट है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि उनके ड्रोन अंतरराष्ट्रीय जल में निगरानी और माइन पहचान के लिए तैनात होते हैं और किसी भी सीमा उल्लंघन का इरादा नहीं रखते।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे दोहराव वाले घटनाक्रम इरान‑अमेरिका के बीच नेविगेशन अधिकारों को लेकर तनाव को बढ़ा रहे हैं, जबकि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ विश्व तेल परिवहन का एक प्रमुख मार्ग है। IRGC ने आगे के उल्लंघनों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है, परंतु अब तक दोनों पक्षों ने सीधा सैन्य टकराव नहीं किया है।
Mk‑18 Kingfish एक छोटा, टॉरपीडो आकार का ड्रोन है, जो गुप्त इंटेलिजेंस संग्रह और माइन डिटेक्शन के लिए बनाया गया है। इस ड्रोन की तैनाती से पता चलता है कि अमेरिकी नौसेना इरानी समुद्री गतिविधियों की निगरानी को लेकर अधिक सतर्क हो गई है, जो क्षेत्रीय कूटनीतिक वार्तालापों पर असर डाल सकता है।
यह घटना पिछले साल इसी जलमार्ग में अमेरिकी ड्रोन को जब्त करने के दावे के बाद की दूसरी रिपोर्ट है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि उनके ड्रोन अंतरराष्ट्रीय जल में निगरानी और माइन पहचान के लिए तैनात होते हैं और किसी भी सीमा उल्लंघन का इरादा नहीं रखते।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे दोहराव वाले घटनाक्रम इरान‑अमेरिका के बीच नेविगेशन अधिकारों को लेकर तनाव को बढ़ा रहे हैं, जबकि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ विश्व तेल परिवहन का एक प्रमुख मार्ग है। IRGC ने आगे के उल्लंघनों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है, परंतु अब तक दोनों पक्षों ने सीधा सैन्य टकराव नहीं किया है।
Mk‑18 Kingfish एक छोटा, टॉरपीडो आकार का ड्रोन है, जो गुप्त इंटेलिजेंस संग्रह और माइन डिटेक्शन के लिए बनाया गया है। इस ड्रोन की तैनाती से पता चलता है कि अमेरिकी नौसेना इरानी समुद्री गतिविधियों की निगरानी को लेकर अधिक सतर्क हो गई है, जो क्षेत्रीय कूटनीतिक वार्तालापों पर असर डाल सकता है।