📷 चित्र स्रोत: Flickr (CC)
स्वास्थ्य
इंदौर के भागीरथपुरा जल संकट में हाईकोर्ट की रिपोर्ट: दूषित पानी को कारण, मुआवजा आदेश
✍️ Amar Ujala · Indore
🗓 29 अग. 2026, 08:47 PM
👁 33
इंदौर हाईकोर्ट की एक सदस्यीय न्यायिक समिति ने कहा कि भागीरथपुरा जल आपदा में 36 मौतों में से 24 का कारण दूषित पानी है और मुआवजा देने की सिफ़ारिश की, पर कोर्ट ने रिपोर्ट सार्वजनिक करने से इनकार किया है।
इंदौर हाईकोर्ट की एक सदस्यीय न्यायिक समिति ने भागीरथपुरा जल आपदा की जांच की, जिसमें 36 लोगों की मौत हुई। समिति ने यह पाया कि दूषित पीने के पानी ने 24 मौतों का सीधा कारण बना, जिससे यह त्रासदी का मुख्य कारण सिद्ध हुआ।
इस निष्कर्ष के आधार पर समिति ने मृतकों के परिजनों को प्रत्येक 20 लाख रुपये तथा अन्य प्रभावित व्यक्तियों को 5 लाख रुपये मुआवजा देने की सिफ़ारिश की। यह राशि पीड़ितों को आर्थिक राहत प्रदान करने और जल प्रदूषण के कारण हुए नुकसान को कम करने के उद्देश्य से निर्धारित की गई है।
इन सिफ़ारिशों के बावजूद हाईकोर्ट ने समिति की पूरी रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है। पीड़ितों के वकीलों ने कहा कि यह कदम जवाबदेही को कमजोर करता है और जल गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को उत्तरदायी ठहराया जाना चाहिए।
रिपोर्ट को बंद रखने के फैसले की आलोचना नागरिक समाज समूहों ने की है, जो पारदर्शिता और मुआवजा योजना के त्वरित कार्यान्वयन की मांग कर रहे हैं, ताकि पीड़ित परिवारों को राहत मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
इस निष्कर्ष के आधार पर समिति ने मृतकों के परिजनों को प्रत्येक 20 लाख रुपये तथा अन्य प्रभावित व्यक्तियों को 5 लाख रुपये मुआवजा देने की सिफ़ारिश की। यह राशि पीड़ितों को आर्थिक राहत प्रदान करने और जल प्रदूषण के कारण हुए नुकसान को कम करने के उद्देश्य से निर्धारित की गई है।
इन सिफ़ारिशों के बावजूद हाईकोर्ट ने समिति की पूरी रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है। पीड़ितों के वकीलों ने कहा कि यह कदम जवाबदेही को कमजोर करता है और जल गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को उत्तरदायी ठहराया जाना चाहिए।
रिपोर्ट को बंद रखने के फैसले की आलोचना नागरिक समाज समूहों ने की है, जो पारदर्शिता और मुआवजा योजना के त्वरित कार्यान्वयन की मांग कर रहे हैं, ताकि पीड़ित परिवारों को राहत मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।