📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Harvib
स्थानीय
इंदौर के टैक्सी चालकों ने 25,000 अवैध बाइक टैक्सी बंद करने की मांग
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 01 अक्टू. 2026, 08:31 PM
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इंदौर में टैक्सी चालकों ने पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन सौंपा, बिना एग्रीगेटर लाइसेंस और पुलिस सत्यापन के चल रही 25,000 बाइक टैक्सी बंद करने की मांग की और भूख हड़ताल की चेतावनी दी।
इंदौर के टैक्सी ड्राइवर संघों ने शहर के पुलिस कमिश्नर को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा, जिसमें लगभग 25,000 दोपहिया टैक्सी सेवाओं को बंद करने की मांग की गई है, जिन्हें वे बिना एग्रीगेटर लाइसेंस और पुलिस सत्यापन के चलने वाला अवैध माना गया है।
संघों का कहना है कि ये अनलाइसेंस्ड बाइक‑टैक्सी कई महीनों से इंदौर की सड़कों पर काम कर रही हैं, जिससे पंजीकृत ऑटो चालकों को अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है और यात्रियों की सुरक्षा को खतरा है। बिना नियामक निगरानी के यात्रियों की सुरक्षा और शहर की परिवहन नीति दोनों प्रभावित हो रही हैं।
अधिकारियों की चुप्पी से निराश होकर, टैक्सी संघों ने चेतावनी दी है कि यदि अवैध संचालन को शीघ्र बंद नहीं किया गया तो वे भूख हड़ताल शुरू करेंगे। उन्होंने पुलिस और परिवहन विभाग से मौजूदा नियमों को लागू करने, अनधिकृत वाहनों को जब्त करने और ऑपरेटरों पर दंड लगाने का आग्रह किया है।
पुलिस कमिश्नर के कार्यालय ने अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, पर यह ज्ञापन दर्शाता है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों पर दबाव बढ़ रहा है, ताकि विरोध को बड़े स्तर पर जाने से पहले ही समस्या का समाधान हो सके।
संघों का कहना है कि ये अनलाइसेंस्ड बाइक‑टैक्सी कई महीनों से इंदौर की सड़कों पर काम कर रही हैं, जिससे पंजीकृत ऑटो चालकों को अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है और यात्रियों की सुरक्षा को खतरा है। बिना नियामक निगरानी के यात्रियों की सुरक्षा और शहर की परिवहन नीति दोनों प्रभावित हो रही हैं।
अधिकारियों की चुप्पी से निराश होकर, टैक्सी संघों ने चेतावनी दी है कि यदि अवैध संचालन को शीघ्र बंद नहीं किया गया तो वे भूख हड़ताल शुरू करेंगे। उन्होंने पुलिस और परिवहन विभाग से मौजूदा नियमों को लागू करने, अनधिकृत वाहनों को जब्त करने और ऑपरेटरों पर दंड लगाने का आग्रह किया है।
पुलिस कमिश्नर के कार्यालय ने अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, पर यह ज्ञापन दर्शाता है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों पर दबाव बढ़ रहा है, ताकि विरोध को बड़े स्तर पर जाने से पहले ही समस्या का समाधान हो सके।