📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Bernard Gagnon
स्थानीय
इंदौर में कृष्णपुरा छत्री पर नदी पुनर्जीवन का संकल्प
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 29 सित. 2026, 07:01 AM
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इंदौर में सोमवार को कृष्णपुरा छत्री घाट पर शहरवासियों और पर्यावरणविदों ने कन्ह‑सरस्वती नदी को पुनर्जीवित करने के जनअभियान की शुरुआत की।
कन्ह‑सरस्वती नदी की बदहाली को दूर करने के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं आया, जिससे स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने नई राह तलाशी। सोमवार को इंदौर के कृष्णपुरा छत्री घाट पर शहर के प्रबुद्धजन और पर्यावरणविदों ने एक जनअभियान का आरम्भ किया, जिसका उद्देश्य नदी को पुनर्जीवित करना है।
स्थानीय अभ्यास मंडल द्वारा आयोजित इस सभा में उपस्थित लोगों ने नदी की सफाई, जल गुणवत्ता की निगरानी और प्रदूषण विरोधी नियमों के कड़ाई से पालन के लिए सार्वजनिक संकल्प लिया। वक्ताओं ने नदी के सांस्कृतिक महत्व और शहरी पारिस्थितिकी में उसकी भूमिका पर प्रकाश डाला, साथ ही अधिकारियों से समुदाय के प्रयासों के साथ पारदर्शी निधि उपयोग की माँग की।
आयोजनकर्ता नियमित रूप से नदी तट की सफाई और कचरा प्रबंधन के बेहतर ढांचे के लिये नगर निगम के साथ सहयोग करने की योजना बना रहे हैं। यह पहल बड़े पैमाने पर नदी पुनर्स्थापना निधियों के संभावित दुरुपयोग पर सार्वजनिक निराशा को दर्शाती है और कन्ह नदी के संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी की इच्छा को उजागर करती है।
अधिकृत अधिकारियों ने अभी तक इस संकल्प पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, परन्तु यह कार्यक्रम इंदौर में नदी पुनर्जीवन के लिये जवाबदेही और ठोस परिणामों की मांग करने वाले नागरिक आंदोलन की शक्ति को दर्शाता है।
स्थानीय अभ्यास मंडल द्वारा आयोजित इस सभा में उपस्थित लोगों ने नदी की सफाई, जल गुणवत्ता की निगरानी और प्रदूषण विरोधी नियमों के कड़ाई से पालन के लिए सार्वजनिक संकल्प लिया। वक्ताओं ने नदी के सांस्कृतिक महत्व और शहरी पारिस्थितिकी में उसकी भूमिका पर प्रकाश डाला, साथ ही अधिकारियों से समुदाय के प्रयासों के साथ पारदर्शी निधि उपयोग की माँग की।
आयोजनकर्ता नियमित रूप से नदी तट की सफाई और कचरा प्रबंधन के बेहतर ढांचे के लिये नगर निगम के साथ सहयोग करने की योजना बना रहे हैं। यह पहल बड़े पैमाने पर नदी पुनर्स्थापना निधियों के संभावित दुरुपयोग पर सार्वजनिक निराशा को दर्शाती है और कन्ह नदी के संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी की इच्छा को उजागर करती है।
अधिकृत अधिकारियों ने अभी तक इस संकल्प पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, परन्तु यह कार्यक्रम इंदौर में नदी पुनर्जीवन के लिये जवाबदेही और ठोस परिणामों की मांग करने वाले नागरिक आंदोलन की शक्ति को दर्शाता है।