📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Chainwit.
बिज़नेस
भारत का अनछुआ भूत‑पर्यटन अर्थव्यवस्था अभी भी अनदेखा
✍️ The Times of India
🗓 01 नव. 2026, 08:52 AM
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भारत में कई भूतिया स्थल हैं जो पर्यटकों को आकर्षित कर सकते हैं, परंतु यह क्षेत्र अभी भी कम विकसित है। विशेषज्ञों का कहना है कि राजस्व और स्थानीय विकास की संभावना बड़ी है, परंतु प्रचार और बुनियादी ढाँचे में कमी है।
भारत में भूतिया कथाओं के लिए प्रसिद्ध कई स्थल हैं, जैसे कि कुदल्हारा का परित्यक्त गाँव और भंगार्ह किला। इन स्थानों पर पर्यटकों की संख्या कम है, और यहाँ व्यवस्थित पर्यटन और बुनियादी ढाँचे की कमी है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि भूत‑पर्यटन को सही ढंग से विकसित किया जाए तो यह लाखों रुपये का राजस्व उत्पन्न कर सकता है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है। परंतु प्रचार, सुरक्षा और आवास सुविधाओं की कमी के कारण यह क्षेत्र अभी भी अनदेखा है।
राजस्थान और उत्तर प्रदेश की स्थानीय प्रशासन ने भूतिया धरोहर को बढ़ावा देने के लिए पायलट परियोजनाएँ शुरू की हैं, परंतु वित्त पोषण अनियमित है। सरकार का ध्यान पारंपरिक धरोहर और साहसिक पर्यटन पर रहा है, जिससे भूत‑पर्यटन को किनारे पर रखा गया है।
जो पर्यटक आते हैं वे अक्सर मुंह से मुंह और सोशल मीडिया पर निर्भर करते हैं, जो कभी-कभी अविश्वसनीय और खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि धरोहर संरक्षण, सुरक्षा प्रोटोकॉल और डिजिटल प्रचार के साथ समन्वित प्रयास से इस क्षेत्र की क्षमता खुल सकती है।
जब तक ऐसे कदम नहीं उठाए जाते, भारत का भूत‑पर्यटन अर्थव्यवस्था एक निचे आकर्षण ही रहेगा, न कि देश के पर्यटन राजस्व का प्रमुख स्रोत।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि भूत‑पर्यटन को सही ढंग से विकसित किया जाए तो यह लाखों रुपये का राजस्व उत्पन्न कर सकता है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है। परंतु प्रचार, सुरक्षा और आवास सुविधाओं की कमी के कारण यह क्षेत्र अभी भी अनदेखा है।
राजस्थान और उत्तर प्रदेश की स्थानीय प्रशासन ने भूतिया धरोहर को बढ़ावा देने के लिए पायलट परियोजनाएँ शुरू की हैं, परंतु वित्त पोषण अनियमित है। सरकार का ध्यान पारंपरिक धरोहर और साहसिक पर्यटन पर रहा है, जिससे भूत‑पर्यटन को किनारे पर रखा गया है।
जो पर्यटक आते हैं वे अक्सर मुंह से मुंह और सोशल मीडिया पर निर्भर करते हैं, जो कभी-कभी अविश्वसनीय और खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि धरोहर संरक्षण, सुरक्षा प्रोटोकॉल और डिजिटल प्रचार के साथ समन्वित प्रयास से इस क्षेत्र की क्षमता खुल सकती है।
जब तक ऐसे कदम नहीं उठाए जाते, भारत का भूत‑पर्यटन अर्थव्यवस्था एक निचे आकर्षण ही रहेगा, न कि देश के पर्यटन राजस्व का प्रमुख स्रोत।