📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Our World in Data
बिज़नेस
भारत की Q1 FY24 जीडीपी वृद्धि 7.1% तक घटने की संभावना, Moneycontrol रिपोर्ट
✍️ Moneycontrol.com
🗓 26 अग. 2026, 06:38 AM
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Moneycontrol की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल‑जून तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि 7.1% तक धीमी हो सकती है।
Moneycontrol द्वारा प्रकाशित एक नवीनतम विश्लेषण के अनुसार, भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) अप्रैल‑जून तिमाही में अनुमानित 7.1% की दर से बढ़ी, जो पिछले तिमाही की गति से धीमी है। यह अनुमान सरकारी आँकड़ों और सांख्यिकीय संशोधनों पर आधारित है और वित्तीय वर्ष के आगे बढ़ते ही आर्थिक विस्तार में मंदी का संकेत देता है।
अर्थशास्त्री बताते हैं कि इस धीमी गति के पीछे घरेलू और बाहरी कई कारक हैं, जैसे वैश्विक मांग में कमी और वस्तु मूल्यों में उतार‑चढ़ाव, जिन्होंने वर्ष की शुरुआत में देखी गई तेज़ी को थोड़ा ठंडा किया है। हालांकि यह गिरावट मंदी का संकेत नहीं देती, पर यह दर्शाती है कि अर्थव्यवस्था अधिक स्थायी गति की ओर बढ़ रही है।
आधिकारिक आँकड़े भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा इस महीने के अंत में जारी किए जाएंगे। नीति निर्माताओं द्वारा इस अस्थायी अनुमान की अंतिम आँकड़ों से तुलना की जाएगी, जिससे मौद्रिक और राजकोषीय उपायों में आवश्यक समायोजन का निर्णय लिया जा सकेगा।
यदि 7.1% की दर पुष्टि हो जाती है, तो यह सरकार द्वारा निर्धारित दीर्घकालिक लक्ष्य से काफी ऊपर रहेगा, पर इस प्रवृत्ति को निवेशकों और विश्लेषकों द्वारा आगामी बजट चक्र से पहले बारीकी से देखा जाएगा।
अर्थशास्त्री बताते हैं कि इस धीमी गति के पीछे घरेलू और बाहरी कई कारक हैं, जैसे वैश्विक मांग में कमी और वस्तु मूल्यों में उतार‑चढ़ाव, जिन्होंने वर्ष की शुरुआत में देखी गई तेज़ी को थोड़ा ठंडा किया है। हालांकि यह गिरावट मंदी का संकेत नहीं देती, पर यह दर्शाती है कि अर्थव्यवस्था अधिक स्थायी गति की ओर बढ़ रही है।
आधिकारिक आँकड़े भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा इस महीने के अंत में जारी किए जाएंगे। नीति निर्माताओं द्वारा इस अस्थायी अनुमान की अंतिम आँकड़ों से तुलना की जाएगी, जिससे मौद्रिक और राजकोषीय उपायों में आवश्यक समायोजन का निर्णय लिया जा सकेगा।
यदि 7.1% की दर पुष्टि हो जाती है, तो यह सरकार द्वारा निर्धारित दीर्घकालिक लक्ष्य से काफी ऊपर रहेगा, पर इस प्रवृत्ति को निवेशकों और विश्लेषकों द्वारा आगामी बजट चक्र से पहले बारीकी से देखा जाएगा।