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भारत का अगला सीमांकन: केवल आँकड़ों पर नहीं, संघीय न्याय पर ज़ोर
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office / Election Commission of
राजनीति

भारत का अगला सीमांकन: केवल आँकड़ों पर नहीं, संघीय न्याय पर ज़ोर

✍️ TheWire.in 🗓 15 अग. 2026, 01:48 PM 👁 27
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भारत के आगामी सीमांकन में केवल आँकड़ों पर नहीं, बल्कि संघीय न्याय पर ज़ोर देने की मांग की जा रही है, विशेषज्ञों और राजनेताओं ने कहा।

भारत का सीमांकन आयोग संसद और विधानसभा के निर्वाचन क्षेत्रों को पुनः निर्धारित करने के लिए तैयार है, जिससे देश का राजनीतिक नक्शा बदल सकता है। यह कार्य संविधान के तहत निर्धारित दीर्घकालिक प्रक्रिया के बाद, 2021 की जनगणना के आंकड़ों के उपलब्ध होने के बाद शुरू होगा।

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि मुख्य उद्देश्य संघीय न्याय को सुनिश्चित करना होना चाहिए। वे चेतावनी देते हैं कि केवल आँकड़ों पर आधारित दृष्टिकोण छोटे राज्यों के प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है और बड़े राज्यों के पक्ष में शक्ति संतुलन को बदल सकता है।

सीमांकन आयोग की सिफ़ारिशें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में सीटों के आवंटन को प्रभावित करेंगी, जिससे पार्टियों की रणनीतियों और गठबंधन राजनीति पर असर पड़ेगा। एक निष्पक्ष सीमांकन लंबे समय से चल रही असमानता के मुद्दों को भी हल कर सकता है।

सरकार ने इन चिंताओं को स्वीकार किया है और जोर दिया है कि सीमांकन प्रक्रिया संवैधानिक दिशानिर्देशों और सांख्यिकीय सटीकता का पालन करेगी। उन्होंने यह भी वादा किया है कि राज्य सरकारों और राजनीतिक दलों के साथ परामर्श करके संतुलित परिणाम सुनिश्चित किया जाएगा।

जैसे-जैसे बहस तेज़ हो रही है, हितधारक एक पारदर्शी, समावेशी प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं जो जनसांख्यिकीय वास्तविकताओं को संघीय सिद्धांतों के साथ संतुलित करे, ताकि भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं में हर क्षेत्र की आवाज़ उचित रूप से प्रतिबिंबित हो।
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