📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / City improvement board
नौकरी
भारत के हाई कोर्ट ने करुणामय नियुक्तियों की सीमा स्पष्ट की
✍️ Udayavani
🗓 28 सित. 2026, 12:17 PM
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सुप्रीम और हाई कोर्ट ने सरकारी नौकरियों में करुणामय नियुक्तियों के उद्देश्य, पात्रता और प्रक्रिया संबंधी सीमाओं को स्पष्ट करने के दिशानिर्देश जारी किए हैं।
सर्वोच्च न्यायालय और कई हाई कोर्टों ने सार्वजनिक क्षेत्र की नौकरियों में करुणामय नियुक्तियों के मानकीकरण के लिए दिशा‑निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों में कहा गया है कि ऐसी नियुक्तियां केवल गंभीर बीमारी, पारिवारिक शोक या अन्य वास्तविक कठिनाइयों का सामना कर रहे उम्मीदवारों के लिए ही होनी चाहिए और इन्हें मेरिट‑आधारित भर्ती को बायपास करने के साधन के रूप में नहीं इस्तेमाल किया जा सकता।
स्पष्टीकरण में पात्रता मानदंड के रूप में उम्मीदवार की स्थिति का दस्तावेज़ी प्रमाण आवश्यक बताया गया है, तथा वह पद वास्तव में खाली होना चाहिए या विशेष रूप से करुणामय मामले के लिए बनाया गया होना चाहिए। न्यायालय ने प्रक्रिया में पारदर्शिता और ऑडिट ट्रेल बनाए रखने पर बल दिया है, ताकि पक्षपात की कोई आशंका न रहे।
निर्देशों में समय‑सीमा भी निर्धारित की गई है: आवेदन निर्दिष्ट अवधि में जमा करना होगा और एक वरिष्ठ अधिकारियों की समीक्षा समिति प्रत्येक मामले का मूल्यांकन करेगी। इन मानकों से विचलन होने पर न्यायिक समीक्षा का अधिकार रहेगा, न्यायालय ने चेतावनी दी है, जिससे सार्वजनिक भर्ती की सत्यनिष्ठा बनी रहे।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम मानवीय पहलुओं को भर्ती की निष्पक्षता के साथ संतुलित करने के लिए उठाया गया है, विशेषकर कई उच्च‑प्रोफ़ाइल विवादों के बाद जहाँ करुणामय नियुक्तियों के दुरुपयोग के आरोप लगे थे। न्यायालय राज्य सरकारों और भर्ती एजेंसियों से इस ढांचे को शीघ्र अपनाने की अपेक्षा करता है।
स्पष्टीकरण में पात्रता मानदंड के रूप में उम्मीदवार की स्थिति का दस्तावेज़ी प्रमाण आवश्यक बताया गया है, तथा वह पद वास्तव में खाली होना चाहिए या विशेष रूप से करुणामय मामले के लिए बनाया गया होना चाहिए। न्यायालय ने प्रक्रिया में पारदर्शिता और ऑडिट ट्रेल बनाए रखने पर बल दिया है, ताकि पक्षपात की कोई आशंका न रहे।
निर्देशों में समय‑सीमा भी निर्धारित की गई है: आवेदन निर्दिष्ट अवधि में जमा करना होगा और एक वरिष्ठ अधिकारियों की समीक्षा समिति प्रत्येक मामले का मूल्यांकन करेगी। इन मानकों से विचलन होने पर न्यायिक समीक्षा का अधिकार रहेगा, न्यायालय ने चेतावनी दी है, जिससे सार्वजनिक भर्ती की सत्यनिष्ठा बनी रहे।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम मानवीय पहलुओं को भर्ती की निष्पक्षता के साथ संतुलित करने के लिए उठाया गया है, विशेषकर कई उच्च‑प्रोफ़ाइल विवादों के बाद जहाँ करुणामय नियुक्तियों के दुरुपयोग के आरोप लगे थे। न्यायालय राज्य सरकारों और भर्ती एजेंसियों से इस ढांचे को शीघ्र अपनाने की अपेक्षा करता है।