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04 अक्टू. 2026•
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भारत में 50 साल से बंधुआ श्रम: कानून है, प्रवर्तन में कमी
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Labour and Employment
अपराध

भारत में 50 साल से बंधुआ श्रम: कानून है, प्रवर्तन में कमी

✍️ India Today 🗓 04 अक्टू. 2026, 01:32 AM 👁 19
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50 साल के कानून के बावजूद बंधुआ श्रम पर भारत में प्रवर्तन कमजोर है, जिससे कड़ी निगरानी की मांग बढ़ी है।

बंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम 1976 में पारित हुआ, जिससे भारत में जबरन श्रम को अवैध घोषित किया गया। पचास साल बीतने के बाद भी कई श्रमिक ऋण‑बंधन में फँसे हुए हैं, विशेषकर ग्रामीण और अनौपचारिक क्षेत्रों में।

हालिया रिपोर्टें बताती हैं कि प्रवर्तन एजेंसियों के पास पर्याप्त संसाधन और व्यवस्थित निगरानी की कमी है, जिससे शोषण जारी रहता है। श्रम संघों और NGOs ने श्रम मंत्रालय से लक्षित जांच, डेटा संग्रह में सुधार और उल्लंघन करने वालों पर कड़ी सजा देने की मांग की है।

सरकार ने राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग और श्रम प्रवर्तन इकाई के माध्यम से निगरानी को सुदृढ़ करने की योजना बताई है, पर विशेषज्ञों का कहना है कि निरंतर राजनीतिक इच्छाशक्ति और समुदाय की भागीदारी के बिना बंधुआ श्रम के खिलाफ 50‑साल की लड़ाई जारी रह सकती है।
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