📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office, Government of India
विदेश
UN ‘Correct the Map’ प्रस्ताव पर भारत ने कहा: जम्मू‑कश्मीर व लद्दाख को आधिकारिक मानचित्र के अनुसार दिखाएँ
✍️ Livemint
🗓 06 सित. 2026, 06:04 PM
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भारत के विदेश मंत्रालय ने यूएन को बताया कि ‘Correct the Map’ प्रस्ताव के तहत किए जाने वाले किसी भी मानचित्र सुधार में जम्मू‑कश्मीर और लद्दाख को भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुसार दिखाया जाना चाहिए।
नई दिल्ली के विदेश मंत्रालय ने यूएन के ‘Correct the Map’ प्रस्ताव पर औपचारिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जम्मू‑कश्मीर और लद्दाख को भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुसार ही दिखाया जाना चाहिए। मंत्रालय ने इस बात पर ज़ोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय मानचित्रों में कोई भी बदलाव भारत द्वारा निर्धारित सीमाओं और नामकरण को मानना चाहिए।
‘Correct the Map’ प्रस्ताव का उद्देश्य विश्वभर में मानचित्र त्रुटियों को सुधारना है, परन्तु यह उत्तर भारत के विवादित क्षेत्रों की दीर्घकालिक दावों को भी उजागर करता है। भारत का मानना है कि उसके आधिकारिक मानचित्र में इन दो केंद्र शासित प्रदेशों की कानूनी स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाई गई है।
यूएन मंच पर अपनी स्थिति दोहराते हुए विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया कि किसी भी ऐसी प्रस्तुति को स्वीकार नहीं किया जाएगा जो भारत के मानचित्र से भिन्न हो, और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य सीमाओं का पालन करने के महत्व को दोहराया।
यह कूटनीतिक कदम क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए उठाया गया है, और भारत बहुपक्षीय मंचों में अपनी मानचित्रिक स्थिति को आगे भी दृढ़ता से रक्षेगा।
यूएन के अगले कदमों के बारे में अभी तक कोई विस्तृत जानकारी नहीं मिली है, परन्तु मंत्रालय की यह स्पष्टता भारत की क्षेत्रीय अखंडता को प्रभावित करने वाले किसी भी एकतरफ़ा परिवर्तन को रोकने के उद्देश्य से है।
‘Correct the Map’ प्रस्ताव का उद्देश्य विश्वभर में मानचित्र त्रुटियों को सुधारना है, परन्तु यह उत्तर भारत के विवादित क्षेत्रों की दीर्घकालिक दावों को भी उजागर करता है। भारत का मानना है कि उसके आधिकारिक मानचित्र में इन दो केंद्र शासित प्रदेशों की कानूनी स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाई गई है।
यूएन मंच पर अपनी स्थिति दोहराते हुए विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया कि किसी भी ऐसी प्रस्तुति को स्वीकार नहीं किया जाएगा जो भारत के मानचित्र से भिन्न हो, और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य सीमाओं का पालन करने के महत्व को दोहराया।
यह कूटनीतिक कदम क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए उठाया गया है, और भारत बहुपक्षीय मंचों में अपनी मानचित्रिक स्थिति को आगे भी दृढ़ता से रक्षेगा।
यूएन के अगले कदमों के बारे में अभी तक कोई विस्तृत जानकारी नहीं मिली है, परन्तु मंत्रालय की यह स्पष्टता भारत की क्षेत्रीय अखंडता को प्रभावित करने वाले किसी भी एकतरफ़ा परिवर्तन को रोकने के उद्देश्य से है।