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विदेश
भारत ने यूएन के ‘इक्वल अर्थ’ मानचित्र को समर्थन दिया, जम्मू-कश्मीर व लद्दाख के गलत चित्रण पर चेतावनी
✍️ Hindustan Times
🗓 06 सित. 2026, 06:04 PM
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भारत ने यूएन के इक्वल अर्थ मानचित्र पहल को समर्थन दिया, साथ ही जम्मू‑कश्मीर और लद्दाख के सटीक चित्रण की आवश्यकता पर बल दिया।
नई दिल्ली ने संयुक्त राष्ट्र के इक्वल अर्थ मानचित्र परियोजना को औपचारिक रूप से समर्थन दिया, इसे वैश्विक डेटा विज़ुअलाइज़ेशन के लिए उपयोगी बताया। हालांकि, सरकार ने यह स्पष्ट किया कि मानचित्र को भारत की सीमाओं को सही रूप में दर्शाना चाहिए, विशेषकर जम्मू‑कश्मीर और लद्दाख क्षेत्रों को, जो राष्ट्रीय अखंडता का अभिन्न हिस्सा हैं।
संयुक्त राष्ट्र में एक ब्रीफ़िंग के दौरान अधिकारियों ने कहा कि सटीक भौगोलिक प्रतिनिधित्व अंतर्राष्ट्रीय डेटा सेट की विश्वसनीयता के लिए आवश्यक है और किसी भी प्रकार की त्रुटि भारत की संप्रभुता को लेकर गलतफहमी पैदा कर सकती है।
यह बयान भारत की व्यापक कूटनीतिक नीति के अनुरूप है, जिसमें वैश्विक मंचों पर अपने क्षेत्रों के अधिकारों की रक्षा को प्राथमिकता दी गई है। जबकि इक्वल अर्थ मानचित्र के वैज्ञानिक और पर्यावरणीय लाभों का स्वागत किया गया, नई दिल्ली ने विवादित क्षेत्रों के सटीक चित्रण को अनिवार्य बताया।
संयुक्त राष्ट्र ने अभी तक भारत की विशिष्ट चिंताओं पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, परन्तु यह संवाद तकनीकी मानचित्रण पहलों और भू‑राजनीतिक संवेदनशीलताओं के बीच संतुलन की आवश्यकता को उजागर करता है।
संयुक्त राष्ट्र में एक ब्रीफ़िंग के दौरान अधिकारियों ने कहा कि सटीक भौगोलिक प्रतिनिधित्व अंतर्राष्ट्रीय डेटा सेट की विश्वसनीयता के लिए आवश्यक है और किसी भी प्रकार की त्रुटि भारत की संप्रभुता को लेकर गलतफहमी पैदा कर सकती है।
यह बयान भारत की व्यापक कूटनीतिक नीति के अनुरूप है, जिसमें वैश्विक मंचों पर अपने क्षेत्रों के अधिकारों की रक्षा को प्राथमिकता दी गई है। जबकि इक्वल अर्थ मानचित्र के वैज्ञानिक और पर्यावरणीय लाभों का स्वागत किया गया, नई दिल्ली ने विवादित क्षेत्रों के सटीक चित्रण को अनिवार्य बताया।
संयुक्त राष्ट्र ने अभी तक भारत की विशिष्ट चिंताओं पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, परन्तु यह संवाद तकनीकी मानचित्रण पहलों और भू‑राजनीतिक संवेदनशीलताओं के बीच संतुलन की आवश्यकता को उजागर करता है।