📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / This Photo was taken by Timothy A. Gonsalves. Fee
मौसम
भारत ने 13 साल में सबसे सूखा मानसून दर्ज किया, 11 राज्यों में भारी वर्षा कमी
✍️ Bhaskar English
🗓 01 अक्टू. 2026, 09:17 AM
👁 15
भारतीय मौसम विभाग ने बताया कि इस वर्ष का मानसून 2011 के बाद सबसे सूखा है, 11 प्रमुख राज्यों में भारी वर्षा कमी देखी गई।
भारतीय मौसम विभाग ने घोषणा की है कि वर्तमान मानसून पिछले 13 वर्षों में देश का सबसे सूखा रहा, जिससे सामान्य वर्षा पैटर्न में स्पष्ट अंतर दिख रहा है। जारी किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि मुख्य मानसून महीनों में कुल वर्षा औसत से काफी कम रही, जिससे नीति निर्माताओं और किसानों में चिंता बढ़ी है।
महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और ओडिशा सहित ग्यारह प्रमुख राज्यों में वर्षा की कमी स्पष्ट रूप से दर्ज की गई है। प्रत्येक राज्य में कमी का स्तर अलग‑अलग है, पर सभी ने इस अवधि के लिए सामान्य मानकों से काफी कम वर्षा प्राप्त की है।
बारिश पर निर्भर फसलों की पैदावार पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जबकि जलाशयों के स्तर भी कम रहने की संभावना है, जिससे आगामी महीनों में जल संकट का खतरा बढ़ सकता है। केंद्र सरकार ने आपातकालीन उपायों की तैयारी का संकेत दिया है, जिसमें अतिरिक्त सिंचाई योजनाएँ और प्रभावित किसानों को वित्तीय सहायता शामिल है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, इस मानसून के समाप्त होने से पहले और भी कमी आ सकती है, जिससे सुधार की संभावना कम हो सकती है। स्थिति की निरंतर निगरानी आवश्यक होगी ताकि आगे की आपातकालीन प्रतिक्रिया को समय पर लागू किया जा सके।
महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और ओडिशा सहित ग्यारह प्रमुख राज्यों में वर्षा की कमी स्पष्ट रूप से दर्ज की गई है। प्रत्येक राज्य में कमी का स्तर अलग‑अलग है, पर सभी ने इस अवधि के लिए सामान्य मानकों से काफी कम वर्षा प्राप्त की है।
बारिश पर निर्भर फसलों की पैदावार पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जबकि जलाशयों के स्तर भी कम रहने की संभावना है, जिससे आगामी महीनों में जल संकट का खतरा बढ़ सकता है। केंद्र सरकार ने आपातकालीन उपायों की तैयारी का संकेत दिया है, जिसमें अतिरिक्त सिंचाई योजनाएँ और प्रभावित किसानों को वित्तीय सहायता शामिल है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, इस मानसून के समाप्त होने से पहले और भी कमी आ सकती है, जिससे सुधार की संभावना कम हो सकती है। स्थिति की निरंतर निगरानी आवश्यक होगी ताकि आगे की आपातकालीन प्रतिक्रिया को समय पर लागू किया जा सके।