📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Permanent Court of Arbitration;
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विदेश
भारत ने सिंधु जल समझौते पर हेग कोर्ट के अस्तित्व पर सवाल उठाया
✍️ Aaj Tak
🗓 01 सित. 2026, 02:39 PM
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भारत ने हेग स्थित परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के अस्तित्व पर सवाल उठाया, जो सिंधु जल समझौते पर निर्णय देने वाला है।
भारत ने हेग स्थित परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (PCA) के अस्तित्व पर औपचारिक रूप से सवाल उठाया है, जो पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते पर विवादों को सुनने के लिए तैयार है। भारतीय अधिकारियों के अनुसार, PCA एक पारंपरिक अदालत नहीं बल्कि प्रशासनिक सहायता, रजिस्ट्री और ट्रिब्यूनल गठन की सुविधा देने वाली संस्था है। इसके निर्णय तभी बाध्यकारी होते हैं जब दोनों पक्ष सहमति दें।
भारत की यह स्थिति इस बात का संकेत देती है कि वह इस समझौते के लिए PCA को वैध न्यायिक संस्था के रूप में नहीं मानता। यह कदम पानी के साझा करने पर भारत-पाकिस्तान के बीच चल रही कूटनीतिक तनावों के बीच आया है और समझौते के प्रवर्तन के भविष्य को लेकर चिंताएँ बढ़ा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि PCA की भूमिका मुख्यतः सहायक है, और इसके निर्णयों के लिए दोनों पक्षों की सहमति आवश्यक है। भारत की चुनौती से विवाद समाधान प्रक्रिया जटिल हो सकती है और सिंधु नदी पर निर्भर लाखों लोगों के जीवन पर असर पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस विवाद पर करीबी नजर रख रहा है, क्योंकि इसका असर क्षेत्रीय स्थिरता और जल संसाधनों पर निर्भर समुदायों के जीवन पर पड़ सकता है।
भारत की यह स्थिति इस बात का संकेत देती है कि वह इस समझौते के लिए PCA को वैध न्यायिक संस्था के रूप में नहीं मानता। यह कदम पानी के साझा करने पर भारत-पाकिस्तान के बीच चल रही कूटनीतिक तनावों के बीच आया है और समझौते के प्रवर्तन के भविष्य को लेकर चिंताएँ बढ़ा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि PCA की भूमिका मुख्यतः सहायक है, और इसके निर्णयों के लिए दोनों पक्षों की सहमति आवश्यक है। भारत की चुनौती से विवाद समाधान प्रक्रिया जटिल हो सकती है और सिंधु नदी पर निर्भर लाखों लोगों के जीवन पर असर पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस विवाद पर करीबी नजर रख रहा है, क्योंकि इसका असर क्षेत्रीय स्थिरता और जल संसाधनों पर निर्भर समुदायों के जीवन पर पड़ सकता है।