📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Women and Child Development
विदेश
भारत ने यूएन के प्रस्तावित विश्व मानचित्र में जम्मू-कश्मीर, लद्दाख के गलत चित्रण पर आपत्ति जताई
✍️ Mid-Day
🗓 07 सित. 2026, 10:03 AM
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भारत ने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावित विश्व मानचित्र में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के गलत चित्रण को लेकर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई, कहा कि इससे देश की संप्रभुता का गलत आभास होगा।
नई दिल्ली के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावित विश्व मानचित्र में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के किसी भी गलत चित्रण को अस्वीकार किया। मंत्रालय ने कहा कि वर्तमान में चर्चा में चल रहे ड्राफ्ट में भारत की अंतरराष्ट्रीय मान्य सीमाओं को सटीक रूप से दर्शाया जाना चाहिए। "इन केंद्र शासित प्रदेशों की वास्तविक स्थिति से भिन्न कोई भी चित्रण भारत के संप्रभु अधिकारों का उल्लंघन माना जाएगा," बयान में कहा गया।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मानचित्र त्रुटियों के खिलाफ कई बार विरोध किया है, जिसमें पिछले मामलों में इन क्षेत्रों को पाकिस्तान या स्वतंत्र इकाई के रूप में दिखाया गया था। इस बार की आपत्ति भी उन समान मुद्दों के संदर्भ में उठाई गई है।
संयुक्त राष्ट्र ने अभी तक मानचित्र का अंतिम संस्करण जारी नहीं किया है और सदस्य देशों को अंतिम स्वीकृति से पहले प्रतिक्रिया देने का अवसर दिया गया है। नई दिल्ली ने यूएन से अनुरोध किया है कि ड्राफ्ट में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत के अभिन्न भाग के रूप में दर्शाया जाए।
विश्लेषकों का मानना है कि जबकि यूएन का मानचित्र मुख्यतः प्रतीकात्मक है, ऐसी प्रस्तुतियाँ कूटनीतिक कथा को प्रभावित कर सकती हैं। भारत की दृढ़ स्थिति वैश्विक मंचों पर अपनी संप्रभुता की रक्षा करने की व्यापक रणनीति को उजागर करती है।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मानचित्र त्रुटियों के खिलाफ कई बार विरोध किया है, जिसमें पिछले मामलों में इन क्षेत्रों को पाकिस्तान या स्वतंत्र इकाई के रूप में दिखाया गया था। इस बार की आपत्ति भी उन समान मुद्दों के संदर्भ में उठाई गई है।
संयुक्त राष्ट्र ने अभी तक मानचित्र का अंतिम संस्करण जारी नहीं किया है और सदस्य देशों को अंतिम स्वीकृति से पहले प्रतिक्रिया देने का अवसर दिया गया है। नई दिल्ली ने यूएन से अनुरोध किया है कि ड्राफ्ट में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत के अभिन्न भाग के रूप में दर्शाया जाए।
विश्लेषकों का मानना है कि जबकि यूएन का मानचित्र मुख्यतः प्रतीकात्मक है, ऐसी प्रस्तुतियाँ कूटनीतिक कथा को प्रभावित कर सकती हैं। भारत की दृढ़ स्थिति वैश्विक मंचों पर अपनी संप्रभुता की रक्षा करने की व्यापक रणनीति को उजागर करती है।