📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Jay Dixit
मनोरंजन
आईएफएफजेके ने नई शुरुआत, ओमर अब्दुल्ला ने क्षेत्र की सिनेमा प्रेम को रेखांकित किया
✍️ Daily Excelsior
🗓 08 सित. 2026, 01:18 PM
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अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव जम्मू-कश्मीर ने नई शुरुआत की, क्षेत्र की सिनेमा के प्रति दीर्घकालिक प्रेम को रेखांकित करते हुए, पूर्व मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने उद्घाटन समारोह में बात की।
अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव जम्मू-कश्मीर (आईएफएफजेके) ने अपने कार्यक्रम में एक नई दिशा की घोषणा की, जिससे क्षेत्रीय प्रतिभा और कहानियों को उजागर करने पर नया जोर दिया गया। आयोजकों ने बताया कि यह महोत्सव एक छोटे मंच से विकसित होकर अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है।
पूर्व मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने सभा में कहा कि सिनेमा ने हमेशा घाटी की सांस्कृतिक समृद्धि को विश्व के सामने लाने का पुल बनाया है। उन्होंने महोत्सव की भूमिका की सराहना की, जो जम्मू और कश्मीर की कलात्मक भावना को संरक्षित करते हुए नई कहानियों को प्रोत्साहित करता है।
यह आयोजन क्षेत्र की सिनेमा के प्रति दीर्घकालिक प्रेम को भी उजागर करता है, जहाँ क्लासिक फ़िल्मों ने लैंडस्केप की खूबसूरती और सामाजिक ताने-बाने को दर्शाया है। आईएफएफजेके उभरते फ़िल्म निर्माताओं को समर्थन, कार्यशालाएँ और ग्रामीण दर्शकों तक पहुँच बढ़ाने के माध्यम से इस विरासत को आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।
आगे के लिए महोत्सव समिति ने शॉर्ट फ़िल्म और डॉक्यूमेंट्री के प्रतिस्पर्धी सेक्शन तथा भारत के विभिन्न फ़िल्म स्कूलों के साथ सहयोग की योजना बताई है, जिससे इस नई शुरुआत की गति बनी रहे और जम्मू-कश्मीर को सिनेमा के मानचित्र पर मजबूत स्थान मिले।
पूर्व मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने सभा में कहा कि सिनेमा ने हमेशा घाटी की सांस्कृतिक समृद्धि को विश्व के सामने लाने का पुल बनाया है। उन्होंने महोत्सव की भूमिका की सराहना की, जो जम्मू और कश्मीर की कलात्मक भावना को संरक्षित करते हुए नई कहानियों को प्रोत्साहित करता है।
यह आयोजन क्षेत्र की सिनेमा के प्रति दीर्घकालिक प्रेम को भी उजागर करता है, जहाँ क्लासिक फ़िल्मों ने लैंडस्केप की खूबसूरती और सामाजिक ताने-बाने को दर्शाया है। आईएफएफजेके उभरते फ़िल्म निर्माताओं को समर्थन, कार्यशालाएँ और ग्रामीण दर्शकों तक पहुँच बढ़ाने के माध्यम से इस विरासत को आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।
आगे के लिए महोत्सव समिति ने शॉर्ट फ़िल्म और डॉक्यूमेंट्री के प्रतिस्पर्धी सेक्शन तथा भारत के विभिन्न फ़िल्म स्कूलों के साथ सहयोग की योजना बताई है, जिससे इस नई शुरुआत की गति बनी रहे और जम्मू-कश्मीर को सिनेमा के मानचित्र पर मजबूत स्थान मिले।