📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Indian Council for Research on International Econo
नौकरी
आईसीरिएअर अध्ययन: भारत में महिलाओं की रोजगार में वृद्धि, लेकिन शर्तें खराब
✍️ Business Standard
🗓 02 नव. 2026, 06:48 AM
👁 17
आईसीरिएअर के एक नए अध्ययन से पता चला है कि भारतीय कार्यबल में महिलाओं की संख्या बढ़ रही है, लेकिन उनके रोजगार की शर्तें खराब हो गई हैं।
प्रतियोगिता और नवाचार पर ऊर्जा और पर्यावरण अनुसंधान संस्थान (आईसीरिएअर) द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन ने भारतीय श्रम बाजार में एक चिंताजनक रुझान को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि के बावजूद, उनके रोजगार की प्रकृति अब पहले से कम अनुकूल हो गई है।
अध्ययन के निष्कर्षों से महिला रोजगार में मात्रा और गुणवत्ता के बीच एक अंतर स्पष्ट होता है। हालांकि अधिक महिलाएं नौकरियां पा रही हैं, लेकिन उन्हें नौकरी मिलने की शर्तें पिछले कालावधि की तुलना में खराब हैं। यह बदलाव देश में उभरते नए रोजगार अवसरों की स्थायित्व और गरिमा के बारे में प्रश्न उठाता है।
अध्ययन में महिलाओं की अर्थव्यवस्था में समावेशन के संरचनात्मक बदलाव पर जोर दिया गया है। स्थिर और सुरक्षित पदों की ओर जाने के बजाय, बढ़ते हुए महिला कार्यबल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कमजोर सुरक्षा और कम अनुकूल परिस्थितियों वाले पदों में प्रवेश कर रहा है। कार्यस्थल पर लिंग समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य वाले नीति निर्माताओं और व्यवसायों के लिए यह रुझान महत्वपूर्ण है।
जबकि भारत अपनी आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के प्रयासों में जुटा है, महिलाओं के लिए बनाए गए नौकरियों की गुणवत्ता एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। आईसीरिएअर की रिपोर्ट यह याद दिलाती है कि केवल संख्या में वृद्धि पर्याप्त नहीं है; वास्तविक प्रगति के लिए उचित और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों का सुनिश्चित होना भी उतना ही आवश्यक है।
अध्ययन के निष्कर्षों से महिला रोजगार में मात्रा और गुणवत्ता के बीच एक अंतर स्पष्ट होता है। हालांकि अधिक महिलाएं नौकरियां पा रही हैं, लेकिन उन्हें नौकरी मिलने की शर्तें पिछले कालावधि की तुलना में खराब हैं। यह बदलाव देश में उभरते नए रोजगार अवसरों की स्थायित्व और गरिमा के बारे में प्रश्न उठाता है।
अध्ययन में महिलाओं की अर्थव्यवस्था में समावेशन के संरचनात्मक बदलाव पर जोर दिया गया है। स्थिर और सुरक्षित पदों की ओर जाने के बजाय, बढ़ते हुए महिला कार्यबल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कमजोर सुरक्षा और कम अनुकूल परिस्थितियों वाले पदों में प्रवेश कर रहा है। कार्यस्थल पर लिंग समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य वाले नीति निर्माताओं और व्यवसायों के लिए यह रुझान महत्वपूर्ण है।
जबकि भारत अपनी आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के प्रयासों में जुटा है, महिलाओं के लिए बनाए गए नौकरियों की गुणवत्ता एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। आईसीरिएअर की रिपोर्ट यह याद दिलाती है कि केवल संख्या में वृद्धि पर्याप्त नहीं है; वास्तविक प्रगति के लिए उचित और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों का सुनिश्चित होना भी उतना ही आवश्यक है।