📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Fesswein
कृषि
ICAR-CCARI ने गोवा के बाँस शिल्प को पुनर्जीवित करने की पहल की
✍️ The Times of India
🗓 06 अक्टू. 2026, 02:47 AM
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ICAR के सेंटर फॉर कॉनज़र्वेशन, एडवांसमेंट एंड रिसर्च इन इंडियन ट्रैडिशनल आर्ट्स (CCARI) ने गोवा के घटते बाँस शिल्प उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए एक कार्यक्रम की घोषणा की है, जिसमें स्थानीय कारीगरों को प्रशिक्षण और बाज़ार कनेक्शन प्रदान किए जाएंगे।
ICAR के सेंटर फॉर कॉनज़र्वेशन, एडवांसमेंट एंड रिसर्च इन इंडियन ट्रैडिशनल आर्ट्स (CCARI) ने गोवा के बाँस शिल्प क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए एक नया कार्यक्रम शुरू किया है, जो हाल के वर्षों में धीरे‑धीरे घटता जा रहा है।
इस पहल के तहत स्थानीय कारीगरों के लिए कौशल‑विकास कार्यशालाएँ आयोजित की जाएँगी, जिनमें पारंपरिक तरीकों को बनाए रखते हुए समकालीन डिजाइन तकनीकों पर भी ध्यान दिया जाएगा। साथ ही, यह कार्यक्रम बाज़ार से सीधे जुड़ाव स्थापित करेगा, जिससे कारीगर अपने उत्पादों को व्यापक दर्शकों तक पहुँचाकर बेहतर कीमतें प्राप्त कर सकें।
पहले समूह के कारीगरों को सतत बाँस कटाई, उत्पाद विविधीकरण और डिजिटल मार्केटिंग पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। CCARI स्थानीय सहकारी समितियों और पर्यटन बोर्डों के साथ मिलकर गोवा की बाँस विरासत को प्रदर्शित करने का लक्ष्य रखता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रयास से स्थानीय रोजगार बढ़ेगा और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण संभव होगा। परियोजना तीन वर्ष चलने वाली है, जिसके दौरान आय स्तर और शिल्प की स्थिरता पर नियमित मूल्यांकन किया जाएगा।
इस पहल के तहत स्थानीय कारीगरों के लिए कौशल‑विकास कार्यशालाएँ आयोजित की जाएँगी, जिनमें पारंपरिक तरीकों को बनाए रखते हुए समकालीन डिजाइन तकनीकों पर भी ध्यान दिया जाएगा। साथ ही, यह कार्यक्रम बाज़ार से सीधे जुड़ाव स्थापित करेगा, जिससे कारीगर अपने उत्पादों को व्यापक दर्शकों तक पहुँचाकर बेहतर कीमतें प्राप्त कर सकें।
पहले समूह के कारीगरों को सतत बाँस कटाई, उत्पाद विविधीकरण और डिजिटल मार्केटिंग पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। CCARI स्थानीय सहकारी समितियों और पर्यटन बोर्डों के साथ मिलकर गोवा की बाँस विरासत को प्रदर्शित करने का लक्ष्य रखता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रयास से स्थानीय रोजगार बढ़ेगा और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण संभव होगा। परियोजना तीन वर्ष चलने वाली है, जिसके दौरान आय स्तर और शिल्प की स्थिरता पर नियमित मूल्यांकन किया जाएगा।