📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Yann Forget
अपराध
आईएएस अनिरुद्ध मुखर्जी पर एमपीपीसीबी में पांच महीने तक अवैध रूप से अध्यक्ष रहने का आरोप, FIR की मांग
✍️ Amar Ujala · Bhopal
🗓 04 नव. 2026, 09:45 AM
👁 15
आईएएस अनिरुद्ध मुखर्जी पर मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष पद पर पांच महीने तक अवैध रूप से बने रहने का आरोप लगा है, जिससे FIR दर्ज करने की मांग की जा रही है।
मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) में आईएएस अधिकारी अनिरुद्ध मुखर्जी के अवैध रूप से पाँच महीने तक अध्यक्ष पद पर बने रहने के आरोपों से नया विवाद उत्पन्न हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, बिना उचित अनुमति के मुखर्जी ने इस पद को पाँच महीने तक जारी रखा, जिससे वरिष्ठ अधिकारियों ने उनके खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने की मांग की है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि बोर्ड के अध्यक्ष की अवधि निर्धारित विधायी प्रावधानों के तहत होती है और किसी भी विस्तार के लिए औपचारिक स्वीकृति आवश्यक है। यदि यह आरोप सिद्ध होता है, तो यह प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है और दंडात्मक कार्रवाई का कारण बन सकता है।
एफआईआर की मांग इस मामले की गंभीरता को दर्शाती है और राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था द्वारा इसे गंभीरता से लिया जा रहा है। जांच में नियुक्ति रिकॉर्ड, पत्राचार और किसी भी प्रक्रिया में चूक की जाँच की जाएगी जिससे यह पता चल सके कि अवैध रूप से पद धारण क्यों हुआ।
एमपीपीसीबी ने अभी तक आधिकारिक बयान नहीं दिया है, पर यह घटना राज्य के प्रमुख पर्यावरण नियामक निकायों में नियुक्तियों पर बढ़ती जांच को उजागर करती है। इस जांच के परिणाम भविष्य में नियामक निकायों की नियुक्तियों के अनुपालन के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकते हैं।
यह मामला अभी भी निगरानी में है और जैसे ही नई जानकारी उपलब्ध होगी, रिपोर्टर आगे की रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि बोर्ड के अध्यक्ष की अवधि निर्धारित विधायी प्रावधानों के तहत होती है और किसी भी विस्तार के लिए औपचारिक स्वीकृति आवश्यक है। यदि यह आरोप सिद्ध होता है, तो यह प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है और दंडात्मक कार्रवाई का कारण बन सकता है।
एफआईआर की मांग इस मामले की गंभीरता को दर्शाती है और राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था द्वारा इसे गंभीरता से लिया जा रहा है। जांच में नियुक्ति रिकॉर्ड, पत्राचार और किसी भी प्रक्रिया में चूक की जाँच की जाएगी जिससे यह पता चल सके कि अवैध रूप से पद धारण क्यों हुआ।
एमपीपीसीबी ने अभी तक आधिकारिक बयान नहीं दिया है, पर यह घटना राज्य के प्रमुख पर्यावरण नियामक निकायों में नियुक्तियों पर बढ़ती जांच को उजागर करती है। इस जांच के परिणाम भविष्य में नियामक निकायों की नियुक्तियों के अनुपालन के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकते हैं।
यह मामला अभी भी निगरानी में है और जैसे ही नई जानकारी उपलब्ध होगी, रिपोर्टर आगे की रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।