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स्वास्थ्य
हिमाचल प्रदेश में विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए एनपीए योजना पर विचार
✍️ The Times of India
🗓 08 सित. 2026, 05:12 AM
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हिमाचल प्रदेश सरकार विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए गैर‑उत्पादक नियुक्ति (एनपीए) योजना पर विचार कर रही है, जिससे स्वास्थ्य विभाग में स्टाफ की कमी को दूर किया जा सके।
हिमाचल प्रदेश सरकार विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए गैर‑उत्पादक नियुक्ति (एनपीए) योजना की समीक्षा कर रही है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य उन क्षेत्रों में अस्थायी या अनुबंधित आधार पर विशेषज्ञ डॉक्टरों को नियुक्त करना है जहाँ नियमित पद खाली हैं, जिससे महत्वपूर्ण चिकित्सा सेवाओं में कोई अंतर न आए।
सूत्रों के अनुसार, एनपीए मॉडल के तहत स्वास्थ्य विभाग को डॉक्टरों को अस्थायी रूप से नियुक्त करने और उनके प्रदर्शन व विभागीय जरूरतों के आधार पर स्थायी पद में बदलने की सुविधा मिलेगी। यह उपाय राज्य के दूरस्थ और पहाड़ी जिलों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को कम करने के लिए तैयार किया गया है।
अब तक स्वास्थ्य मंत्रालय ने आधिकारिक बयान नहीं दिया है, परन्तु अधिकारियों ने बताया कि नीति का मसौदा राज्य मंत्रिपरिषद द्वारा विचाराधीन है। मंजूरी मिलने पर यह योजना अगले वित्तीय वर्ष में लागू हो सकती है, जिससे अछूते क्षेत्रों में रोगी देखभाल में सुधार की उम्मीद है।
डॉक्टरों के पेशेवर विकास और सेवा गुणवत्ता पर संभावित प्रभाव को समझने के लिए चिकित्सा संघों सहित कई हितधारकों से परामर्श किया गया है। इस कदम से भारत के विभिन्न राज्यों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए नई भर्ती रणनीतियों को अपनाने की दिशा में संकेत मिलता है।
सूत्रों के अनुसार, एनपीए मॉडल के तहत स्वास्थ्य विभाग को डॉक्टरों को अस्थायी रूप से नियुक्त करने और उनके प्रदर्शन व विभागीय जरूरतों के आधार पर स्थायी पद में बदलने की सुविधा मिलेगी। यह उपाय राज्य के दूरस्थ और पहाड़ी जिलों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को कम करने के लिए तैयार किया गया है।
अब तक स्वास्थ्य मंत्रालय ने आधिकारिक बयान नहीं दिया है, परन्तु अधिकारियों ने बताया कि नीति का मसौदा राज्य मंत्रिपरिषद द्वारा विचाराधीन है। मंजूरी मिलने पर यह योजना अगले वित्तीय वर्ष में लागू हो सकती है, जिससे अछूते क्षेत्रों में रोगी देखभाल में सुधार की उम्मीद है।
डॉक्टरों के पेशेवर विकास और सेवा गुणवत्ता पर संभावित प्रभाव को समझने के लिए चिकित्सा संघों सहित कई हितधारकों से परामर्श किया गया है। इस कदम से भारत के विभिन्न राज्यों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए नई भर्ती रणनीतियों को अपनाने की दिशा में संकेत मिलता है।