📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / UnpetitproleX
शिक्षा
हिमाचल प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेज पाठ्यक्रम में अप्रींटिसशिप के लिए समझौता किया
✍️ Hindustan Times
🗓 11 सित. 2026, 02:49 PM
👁 42
हिमाचल प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने राज्य के कॉलेजों में अप्रींटिसशिप‑समाहित पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
हिमाचल प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने हाल ही में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका उद्देश्य राज्य के कॉलेजों में स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में अप्रींटिसशिप घटक को सम्मिलित करना है। यह समझौता उद्योग साझेदारों और कौशल विकास एजेंसियों के साथ मिलकर तैयार किया गया है, जिससे छात्रों को शैक्षणिक अध्ययन के साथ‑साथ व्यावहारिक कार्य अनुभव प्राप्त हो सके।
समझौते के तहत चयनित कॉलेज अपने पाठ्यक्रमों को पुनः डिजाइन करेंगे और अनिवार्य अप्रींटिसशिप अवधि को शामिल करेंगे, जहाँ छात्र स्थानीय उद्योगों, विनिर्माण इकाइयों और सेवा प्रदाताओं के साथ काम करेंगे। यह पहल सैद्धांतिक ज्ञान और उद्योग की मांगों के बीच की खाई को पाटने, स्नातकों की रोजगारयोग्यता बढ़ाने और क्षेत्र में कौशल की कमी को दूर करने के लिए की गई है।
विभाग ने एक चरणबद्ध कार्यान्वयन योजना तैयार की है, जिसमें इंजीनियरिंग, होटल प्रबंधन और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में अगले शैक्षणिक वर्ष से पायलट कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। परिणामों की निगरानी के लिए संकाय और उद्योग प्रतिनिधियों से मिलकर एक समिति स्थापित की जाएगी, जो आवश्यक सुधारों की सिफारिश करेगी।
सफलता मिलने पर यह अप्रींटिसशिप‑समाहित मॉडल अन्य भारतीय राज्यों के लिए एक मॉडल बन सकता है, जिससे उच्च शिक्षा को वास्तविक कौशल आवश्यकताओं के साथ संरेखित किया जा सके और राज्य के आर्थिक विकास को गति मिले।
समझौते के तहत चयनित कॉलेज अपने पाठ्यक्रमों को पुनः डिजाइन करेंगे और अनिवार्य अप्रींटिसशिप अवधि को शामिल करेंगे, जहाँ छात्र स्थानीय उद्योगों, विनिर्माण इकाइयों और सेवा प्रदाताओं के साथ काम करेंगे। यह पहल सैद्धांतिक ज्ञान और उद्योग की मांगों के बीच की खाई को पाटने, स्नातकों की रोजगारयोग्यता बढ़ाने और क्षेत्र में कौशल की कमी को दूर करने के लिए की गई है।
विभाग ने एक चरणबद्ध कार्यान्वयन योजना तैयार की है, जिसमें इंजीनियरिंग, होटल प्रबंधन और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में अगले शैक्षणिक वर्ष से पायलट कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। परिणामों की निगरानी के लिए संकाय और उद्योग प्रतिनिधियों से मिलकर एक समिति स्थापित की जाएगी, जो आवश्यक सुधारों की सिफारिश करेगी।
सफलता मिलने पर यह अप्रींटिसशिप‑समाहित मॉडल अन्य भारतीय राज्यों के लिए एक मॉडल बन सकता है, जिससे उच्च शिक्षा को वास्तविक कौशल आवश्यकताओं के साथ संरेखित किया जा सके और राज्य के आर्थिक विकास को गति मिले।