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09 अक्टू. 2026•
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हिमाचल के सेब किसानों ने श्रम कमी से निपटने के लिए चीनी मोनोरेल का परीक्षण किया
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / UnpetitproleX
कृषि

हिमाचल के सेब किसानों ने श्रम कमी से निपटने के लिए चीनी मोनोरेल का परीक्षण किया

✍️ The New Indian Express 🗓 09 अक्टू. 2026, 07:36 PM 👁 14
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हिमाचल प्रदेश के सेब किसान श्रम कमी को दूर करने के लिए चीनी मोनोरेल प्रणाली का परीक्षण शुरू कर चुके हैं।

हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में सेब के बागों में श्रम की कमी को दूर करने के लिए किसान चीनी मोनोरेल प्रणाली का परीक्षण कर रहे हैं। मूलतः औद्योगिक सामग्री परिवहन के लिए विकसित यह तकनीक अब बागों में फलों और उपकरणों को ऊँची ढलानों पर ले जाने के लिए अनुकूलित की जा रही है। किसानों का मानना है कि इस यांत्रिक समाधान से हाथों से काम करने वाले श्रमिकों पर निर्भरता घटेगी, जो हाल के वर्षों में महँगी और दुर्लभ हो गई है। परीक्षण में कुछ मोनोरेल कार्टों को पेड़ों की पंक्तियों के बीच अस्थायी ट्रैक पर चलाया जा रहा है, और राज्य कृषि विभाग के अधिकारी इसकी व्यवहारिकता और व्यापक अपनाने की संभावना का मूल्यांकन कर रहे हैं।

यह कदम भारतीय किसानों में बढ़ती तकनीकी प्रवृत्ति को दर्शाता है, जहाँ परंपरागत हाथ से किए जाने वाले कार्यों को यांत्रिक विकल्पों से बदलने की कोशिश की जा रही है। प्रारंभिक अवलोकनों से पता चलता है कि मोनोरेल बागों में फसल कटाई को सुगम बना सकता है और खड़ी ढलानों पर काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा में सुधार कर सकता है। व्यापक कार्यान्वयन से पहले उत्पादकता और लागत‑प्रभावशीलता पर विस्तृत डेटा एकत्र किया जाएगा।

सफलता मिलने पर यह मोनोरेल पहाड़ी क्षेत्रों में अन्य श्रम‑गहन फसलों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है, जिससे भारतीय कृषि को जनसांख्यिकीय चुनौतियों का तकनीकी समाधान मिल सकेगा।
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