📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of New and Renewable Energy, Government o
कृषि
हरियाणा ने चार जिलों में 402 करोड़ रुपये की सौर-संचालित सूक्ष्म सिंचाई योजना मंजूर की
✍️ DD News
🗓 06 सित. 2026, 08:33 PM
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राज्य सरकार ने चार जिलों में सौर-संचालित सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली स्थापित करने के लिए 402 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी, जिससे किसानों को जल बचत में मदद मिलेगी।
हरियाणा की मंत्रिपरिषद ने 402 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है, जिसके तहत राज्य के चार जिलों में सौर‑संचालित सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली स्थापित की जाएगी। यह योजना परम्परागत डीजल पंपों को नवीकरणीय ऊर्जा वाले उपकरणों से बदलने, बिजली की लागत घटाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने के उद्देश्य से तैयार की गई है।
पर्यावरण‑सुरक्षित कृषि को बढ़ावा देने के तहत यह पहल छोटे और सीमांत किसानों को लक्षित करती है, जो मुख्य रूप से भू‑जल पर निर्भर हैं। सटीक जल आपूर्ति के माध्यम से सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली फसलों की पैदावार बढ़ाने के साथ‑साथ जल संरक्षण में भी सहायक होगी।
कार्यान्वयन का कार्य कृषि विभाग के अधीन रहेगा, जो स्थानीय निकायों के साथ मिलकर स्थापित करने की प्रक्रिया और किसानों को प्रशिक्षण देने की देखरेख करेगा। पूरी राशि उपकरण खरीद, स्थापना और क्षमता‑निर्माण गतिविधियों के लिए आवंटित की गई है, और अगले 12 महीनों में कार्य पूरा होने की उम्मीद है।
यदि यह योजना सफल रहती है, तो यह अन्य राज्यों के लिए नवीकरणीय ऊर्जा और आधुनिक कृषि को जोड़ने का एक आदर्श मॉडल बन सकती है, जिससे भारत के जल सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को साकार करने में मदद मिलेगी।
पर्यावरण‑सुरक्षित कृषि को बढ़ावा देने के तहत यह पहल छोटे और सीमांत किसानों को लक्षित करती है, जो मुख्य रूप से भू‑जल पर निर्भर हैं। सटीक जल आपूर्ति के माध्यम से सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली फसलों की पैदावार बढ़ाने के साथ‑साथ जल संरक्षण में भी सहायक होगी।
कार्यान्वयन का कार्य कृषि विभाग के अधीन रहेगा, जो स्थानीय निकायों के साथ मिलकर स्थापित करने की प्रक्रिया और किसानों को प्रशिक्षण देने की देखरेख करेगा। पूरी राशि उपकरण खरीद, स्थापना और क्षमता‑निर्माण गतिविधियों के लिए आवंटित की गई है, और अगले 12 महीनों में कार्य पूरा होने की उम्मीद है।
यदि यह योजना सफल रहती है, तो यह अन्य राज्यों के लिए नवीकरणीय ऊर्जा और आधुनिक कृषि को जोड़ने का एक आदर्श मॉडल बन सकती है, जिससे भारत के जल सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को साकार करने में मदद मिलेगी।