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हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर में असू चंड पर सिंधी समाज में दिखा उत्साह, झूलेलाल साईं की महिमा का गुणगान
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चंद्र दर्शन के पावन अवसर पर 12 अक्टूबर को असू चंड के उपलक्ष्य में हनुमानगढ़ एवं श्रीगंगानगर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में सिंधी समाज ने धार्मिक उत्साह के साथ पूज्य झूलेलाल साईं का गुणगान किया।
चंद्र दर्शन के पावन अवसर पर 12 अक्टूबर को असू चंड के उपलक्ष्य में हनुमानगढ़ एवं श्रीगंगानगर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में सिंधी समाज में गहरा धार्मिक उत्साह देखने को मिला। पूज्य झूलेलाल साईं के प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास के साथ समाजजन अपनी सदियों पुरानी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का निर्वहन कर रहे हैं।
हनुमानगढ़ जिले के सुरेशिया, गांधीनगर, हनुमानगढ़ टाउन, नोहर, पीलीबंगा एवं भादरा सहित आसपास के क्षेत्रों तथा श्रीगंगानगर जिले के श्रीगंगानगर, पदमपुर, सूरतगढ़, करणपुर एवं अन्य स्थानों पर असू चंड के अवसर पर विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन आयोजनों में समाज के लोग बड़ी संख्या में एकत्रित हुए और ज्योत प्रज्वलन, भजन-कीर्तन एवं पंजिड़ा गायन के माध्यम से झूलेलाल साईं की महिमा का गुणगान किया।
असू चंड का पर्व सिंधी समाज के लिए न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह अपनी विशिष्ट पहचान, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है। विभिन्न स्थानों पर आयोजित ये कार्यक्रम समाज के लोगों को आपस में जोड़ने और नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध संस्कृति से परिचित कराने में अहम भूमिका निभाते हैं।
हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर अंचल में इस पर्व से जुड़ी गतिविधियां सिंधी समाज की सामूहिक आस्था और सांस्कृतिक निरंतरता को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं। पूज्य झूलेलाल साईं के प्रति यह श्रद्धा समाज को प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का पावन संदेश देती है, जो इस पर्व की मूल भावना है।
हनुमानगढ़ जिले के सुरेशिया, गांधीनगर, हनुमानगढ़ टाउन, नोहर, पीलीबंगा एवं भादरा सहित आसपास के क्षेत्रों तथा श्रीगंगानगर जिले के श्रीगंगानगर, पदमपुर, सूरतगढ़, करणपुर एवं अन्य स्थानों पर असू चंड के अवसर पर विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन आयोजनों में समाज के लोग बड़ी संख्या में एकत्रित हुए और ज्योत प्रज्वलन, भजन-कीर्तन एवं पंजिड़ा गायन के माध्यम से झूलेलाल साईं की महिमा का गुणगान किया।
असू चंड का पर्व सिंधी समाज के लिए न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह अपनी विशिष्ट पहचान, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है। विभिन्न स्थानों पर आयोजित ये कार्यक्रम समाज के लोगों को आपस में जोड़ने और नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध संस्कृति से परिचित कराने में अहम भूमिका निभाते हैं।
हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर अंचल में इस पर्व से जुड़ी गतिविधियां सिंधी समाज की सामूहिक आस्था और सांस्कृतिक निरंतरता को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं। पूज्य झूलेलाल साईं के प्रति यह श्रद्धा समाज को प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का पावन संदेश देती है, जो इस पर्व की मूल भावना है।