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हजारीबाग के केरेडारी में चंद्रगुप्त कोल परियोजना में रैयतों को रोजगार न मिलने का आरोप
हजारीबाग के केरेडारी में चंद्रगुप्त कोल परियोजना में रैयतों को रोजगार न मिलने और बाहरी ड्राइवरों को प्राथमिकता देने के आरोप उठे हैं, जिससे स्थानीय बेरोजगार युवाओं में रोष बढ़ा है।
हजारीबाग जिले के केरेडारी में स्थित चंद्रगुप्त कोल परियोजना में रैयतों और स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार न मिलने का आरोप उठाया गया है। परियोजना के कार्यान्वयन में सुशी इंफ्रा के जनरल मैनेजर आर.एस. यादव पर रैयतों को केवल आश्वासन देना और वास्तविक रोजगार न देना का आरोप है।
स्थानीय युवाओं का कहना है कि कंपनी ने पहले उनका ड्राइविंग ट्रायल लिया था, परन्तु ट्रायल के बाद भी उन्हें कोई कार्यस्थल नहीं दिया गया। वहीं, बाहरी ड्राइवरों को कम वेतन पर प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे स्थानीय विस्थापित और बेरोजगार युवाओं को निराशा का सामना करना पड़ रहा है।
रैयतों का आरोप है कि यदि स्थानीय ड्राइवरों को नियुक्त किया जाता तो उन्हें निर्धारित एचपीसी दर के अनुसार भुगतान किया जाता, परन्तु कंपनी ने इस बात को नज़रअंदाज़ किया है। इस कारण से प्रभावित परिवारों में रोष और असंतोष व्याप्त हो गया है।
रैयतों और स्थानीय युवाओं ने निष्पक्ष जांच तथा उचित न्याय की मांग की है और पूछे गये प्रश्नों—ट्रायल के बाद रोजगार न देना, विस्थापित परिवारों को रोजगार न देना, भुगतान दरों में नियमों का पालन न होना—का स्पष्ट उत्तर मांगा है। अब सीसीएल और सुशी इंफ्रा का रुख देखना बचेगा।
स्थानीय युवाओं का कहना है कि कंपनी ने पहले उनका ड्राइविंग ट्रायल लिया था, परन्तु ट्रायल के बाद भी उन्हें कोई कार्यस्थल नहीं दिया गया। वहीं, बाहरी ड्राइवरों को कम वेतन पर प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे स्थानीय विस्थापित और बेरोजगार युवाओं को निराशा का सामना करना पड़ रहा है।
रैयतों का आरोप है कि यदि स्थानीय ड्राइवरों को नियुक्त किया जाता तो उन्हें निर्धारित एचपीसी दर के अनुसार भुगतान किया जाता, परन्तु कंपनी ने इस बात को नज़रअंदाज़ किया है। इस कारण से प्रभावित परिवारों में रोष और असंतोष व्याप्त हो गया है।
रैयतों और स्थानीय युवाओं ने निष्पक्ष जांच तथा उचित न्याय की मांग की है और पूछे गये प्रश्नों—ट्रायल के बाद रोजगार न देना, विस्थापित परिवारों को रोजगार न देना, भुगतान दरों में नियमों का पालन न होना—का स्पष्ट उत्तर मांगा है। अब सीसीएल और सुशी इंफ्रा का रुख देखना बचेगा।