अपराध
हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में दुष्कर्म मामले में हाईकोर्ट ने पुलिस निलंबन का आदेश दिया, पीड़ित को सुविधाएँ सुनिश्चित करने का निर्देश
झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में महिला से दुष्कर्म के मामले में तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित करने का आदेश दिया और पीड़ित को आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
झारखंड हाईकोर्ट में सोमवार को हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में महिला से दुष्कर्म के मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान बताया गया कि मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गयी है और जांच जारी है। तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित करने का आदेश भी हाईकोर्ट ने दिया।
सुनवाई के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा) द्वारा डिटेंशन सेंटर में बंद महिला के साथ दुष्कर्म की सीलबंद रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गयी। राज्य सरकार ने इस रिपोर्ट के आधार पर शपथ पत्र दाखिल किया, जिसमें एफआईआर दर्ज होने, पुलिसकर्मियों के निलंबन और जांच जारी रहने की जानकारी दी गई।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि डिटेंशन सेंटर में रहने के दौरान पीड़ित महिला को सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ। कोर्ट ने महिला की स्थिति और उसकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जरूरी व्यवस्था सुनिश्चित करने का आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान महिला को बांग्लादेश भेजे जाने से जुड़ा मामला भी सामने आया। राज्य सरकार ने बताया कि 2023 से केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय को पत्र भेजे जा रहे हैं, पर अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता को इस विषय पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा) द्वारा डिटेंशन सेंटर में बंद महिला के साथ दुष्कर्म की सीलबंद रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गयी। राज्य सरकार ने इस रिपोर्ट के आधार पर शपथ पत्र दाखिल किया, जिसमें एफआईआर दर्ज होने, पुलिसकर्मियों के निलंबन और जांच जारी रहने की जानकारी दी गई।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि डिटेंशन सेंटर में रहने के दौरान पीड़ित महिला को सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ। कोर्ट ने महिला की स्थिति और उसकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जरूरी व्यवस्था सुनिश्चित करने का आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान महिला को बांग्लादेश भेजे जाने से जुड़ा मामला भी सामने आया। राज्य सरकार ने बताया कि 2023 से केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय को पत्र भेजे जा रहे हैं, पर अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता को इस विषय पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।