स्थानीय
हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: नेहरू प्लेस में अनधिकृत वेंडर्स पर कार्रवाई का रास्ता साफ
नेहरू प्लेस नो-वेंडिंग जोन घोषित, कालकाजी सिविल सोसाइटी की कानूनी लड़ाई को मिली अहम सफलता
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर को नो-हॉकिंग और नो-वेंडिंग जोन घोषित करते हुए अनधिकृत वेंडर्स के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ कर दिया है। अदालत के 28 सितंबर 2026 के आदेश के अनुसार, चिह्नित 90 वेंडर्स को 12 अक्टूबर तक निर्धारित वैकल्पिक स्थल पर स्थानांतरित होना था। इसके बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) को क्षेत्र से अनधिकृत वेंडर्स हटाने की कार्रवाई करने की छूट दी गई है।
इस फैसले का संबंध कालकाजी सिविल सोसाइटी की ओर से गोविंदपुरी मेट्रो स्टेशन के पास अग्रवाल धर्मशाला के सामने वेंडर्स को स्थानांतरित किए जाने के खिलाफ दायर याचिका से भी है। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, कालकाजी सिविल सोसाइटी ने याचिका संख्या W.P.(C) 6221/2022 के माध्यम से इस स्थान पर वेंडर्स को बैठाने के फैसले को चुनौती दी थी।
खविंदर सिंह कैप्टन के नेतृत्व में उठाया गया था मुद्दा
कालकाजी सिविल सोसाइटी के अध्यक्ष खविंदर सिंह कैप्टन के नेतृत्व में इस मामले को कानूनी स्तर पर उठाया गया। सोसाइटी का पक्ष था कि गोविंदपुरी मेट्रो स्टेशन के निकट अग्रवाल धर्मशाला के सामने वेंडर्स को स्थानांतरित करने से स्थानीय निवासियों और आसपास के क्षेत्र की व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
सोसाइटी की ओर से इस कानूनी लड़ाई में एडवोकेट राजिंदर सिंह, एडवोकेट आदित्य सिंह और एडवोकेट जसकीरत सिंह के योगदान का भी उल्लेख किया गया है। सोसाइटी ने इस घटनाक्रम को स्थानीय निवासियों की चिंताओं और क्षेत्र की व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को अदालत के समक्ष रखने के प्रयास का महत्वपूर्ण परिणाम बताया है।
अदालत के आदेश में क्या है खास?
अदालत ने नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर के निर्धारित हिस्से को छोड़कर शेष क्षेत्र को नो-हॉकिंग और नो-वेंडिंग जोन घोषित किया। आदेश में 90 चिह्नित वेंडर्स को वैकल्पिक स्थल पर जाने की व्यवस्था दी गई है। साथ ही, टाउन वेंडिंग कमेटी-II को वेंडर्स के वेंडिंग प्रमाणपत्र और उनके लिए उपयुक्त स्थान के संबंध में निर्णय लेने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्धारित समयसीमा के बाद MCD अनधिकृत वेंडर्स को हटाने की कार्रवाई कर सकती है। इस तरह आदेश में क्षेत्र की व्यवस्था बनाए रखने के साथ पात्र वेंडर्स के लिए वैकल्पिक स्थान और उनके अधिकारों पर निर्णय की प्रक्रिया का भी प्रावधान है।
स्थानीय क्षेत्र की व्यवस्था पर फिर चर्चा
इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि सार्वजनिक स्थानों पर वेंडिंग की व्यवस्था तय करते समय स्थानीय निवासियों की सुविधाओं, आवागमन, सुरक्षा और वेंडर्स की आजीविका के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
कालकाजी सिविल सोसाइटी के लिए अग्रवाल धर्मशाला के सामने वाले क्षेत्र का मुद्दा लंबे समय से कानूनी लड़ाई का विषय रहा है। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई और संबंधित अधिकारियों द्वारा आदेश के अनुपालन पर नजर रहेगी।
इस फैसले का संबंध कालकाजी सिविल सोसाइटी की ओर से गोविंदपुरी मेट्रो स्टेशन के पास अग्रवाल धर्मशाला के सामने वेंडर्स को स्थानांतरित किए जाने के खिलाफ दायर याचिका से भी है। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, कालकाजी सिविल सोसाइटी ने याचिका संख्या W.P.(C) 6221/2022 के माध्यम से इस स्थान पर वेंडर्स को बैठाने के फैसले को चुनौती दी थी।
खविंदर सिंह कैप्टन के नेतृत्व में उठाया गया था मुद्दा
कालकाजी सिविल सोसाइटी के अध्यक्ष खविंदर सिंह कैप्टन के नेतृत्व में इस मामले को कानूनी स्तर पर उठाया गया। सोसाइटी का पक्ष था कि गोविंदपुरी मेट्रो स्टेशन के निकट अग्रवाल धर्मशाला के सामने वेंडर्स को स्थानांतरित करने से स्थानीय निवासियों और आसपास के क्षेत्र की व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
सोसाइटी की ओर से इस कानूनी लड़ाई में एडवोकेट राजिंदर सिंह, एडवोकेट आदित्य सिंह और एडवोकेट जसकीरत सिंह के योगदान का भी उल्लेख किया गया है। सोसाइटी ने इस घटनाक्रम को स्थानीय निवासियों की चिंताओं और क्षेत्र की व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को अदालत के समक्ष रखने के प्रयास का महत्वपूर्ण परिणाम बताया है।
अदालत के आदेश में क्या है खास?
अदालत ने नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर के निर्धारित हिस्से को छोड़कर शेष क्षेत्र को नो-हॉकिंग और नो-वेंडिंग जोन घोषित किया। आदेश में 90 चिह्नित वेंडर्स को वैकल्पिक स्थल पर जाने की व्यवस्था दी गई है। साथ ही, टाउन वेंडिंग कमेटी-II को वेंडर्स के वेंडिंग प्रमाणपत्र और उनके लिए उपयुक्त स्थान के संबंध में निर्णय लेने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्धारित समयसीमा के बाद MCD अनधिकृत वेंडर्स को हटाने की कार्रवाई कर सकती है। इस तरह आदेश में क्षेत्र की व्यवस्था बनाए रखने के साथ पात्र वेंडर्स के लिए वैकल्पिक स्थान और उनके अधिकारों पर निर्णय की प्रक्रिया का भी प्रावधान है।
स्थानीय क्षेत्र की व्यवस्था पर फिर चर्चा
इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि सार्वजनिक स्थानों पर वेंडिंग की व्यवस्था तय करते समय स्थानीय निवासियों की सुविधाओं, आवागमन, सुरक्षा और वेंडर्स की आजीविका के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
कालकाजी सिविल सोसाइटी के लिए अग्रवाल धर्मशाला के सामने वाले क्षेत्र का मुद्दा लंबे समय से कानूनी लड़ाई का विषय रहा है। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई और संबंधित अधिकारियों द्वारा आदेश के अनुपालन पर नजर रहेगी।