📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Internet Archive Book Images
अपराध
ग्वालियर: सिंधिया राजघराने की 41,000 करोड़ की संपत्ति विभाजन पर नई आपत्ति पर सुनवाई
✍️ Amar Ujala · Gwalior
🗓 14 अक्टू. 2026, 10:00 AM
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प्रतिमा देवी राना ने सिंधिया राजघराने की 41,000 करोड़ की संपत्ति के समझौते को हस्ताक्षर में धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए नई आपत्ति दायर की है। आज ग्वालियर के न्यायालय में इस पर सुनवाई होगी।
मध्य प्रदेश के प्रमुख राजघरानों में से एक सिंधिया राजघराने की 41,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्ति के बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। पहले हुए समझौते में परिवार के सदस्यों के बीच इस विशाल संपत्ति को बाँटने की कोशिश की गई थी।
गुज़रते मंगलवार को प्रतिमा देवी राना ने उस समझौते को चुनौती देते हुए एक आवेदन दायर किया। उन्होंने कहा कि समझौते पर हस्ताक्षर में धोखाधड़ी हुई है, जिससे समझौते की वैधता पर सवाल उठता है और वह इसे रद्द करवाना चाहती हैं।
ग्वालियर के न्यायालय ने आज ही राना के आवेदन पर सुनवाई निर्धारित की है। यदि न्यायाधीश को धोखाधड़ी के आरोप में ठोस सबूत मिलते हैं, तो पहले से तय बंटवारा रद्द हो सकता है, जिससे पुनः बातचीत और संभावित मुकदमेबाजी की संभावना बनती है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संपत्ति के विवाद में दस्तावेज़ीकरण और कई हितधारकों का होना आम बात है, और किसी भी प्रकार की फर्जी हस्ताक्षर की शिकायत गंभीर मानी जाती है। आज की सुनवाई का परिणाम इस बंटवारे के भविष्य को निर्धारित करेगा और भारत में समान राजपरिवारिक संपत्ति विवादों के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है।
गुज़रते मंगलवार को प्रतिमा देवी राना ने उस समझौते को चुनौती देते हुए एक आवेदन दायर किया। उन्होंने कहा कि समझौते पर हस्ताक्षर में धोखाधड़ी हुई है, जिससे समझौते की वैधता पर सवाल उठता है और वह इसे रद्द करवाना चाहती हैं।
ग्वालियर के न्यायालय ने आज ही राना के आवेदन पर सुनवाई निर्धारित की है। यदि न्यायाधीश को धोखाधड़ी के आरोप में ठोस सबूत मिलते हैं, तो पहले से तय बंटवारा रद्द हो सकता है, जिससे पुनः बातचीत और संभावित मुकदमेबाजी की संभावना बनती है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संपत्ति के विवाद में दस्तावेज़ीकरण और कई हितधारकों का होना आम बात है, और किसी भी प्रकार की फर्जी हस्ताक्षर की शिकायत गंभीर मानी जाती है। आज की सुनवाई का परिणाम इस बंटवारे के भविष्य को निर्धारित करेगा और भारत में समान राजपरिवारिक संपत्ति विवादों के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है।