📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Maulik Kansara
अपराध
गुजरात हाई कोर्ट ने माँ के व्यभिचार मामले में 16‑साल के बच्चे की गवाही को अस्वीकार किया
✍️ Live Law
🗓 09 अक्टू. 2026, 09:37 PM
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गुजरात हाई कोर्ट ने यह फैसला सुनाया कि माँ के व्यभिचार के आरोप में 16‑साल के बच्चे को गवाह के रूप में पूछताछ नहीं की जा सकती, क्योंकि वह नाबालिग है।
गुजरात हाई कोर्ट ने माँ के व्यभिचार के आरोप वाले मामले में 16‑साल के बच्चे को गवाह के रूप में पूछताछ करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि नाबालिग की स्थिति ऐसे निजी मामलों में अनिवार्य गवाही को रोकती है, और साक्ष्य अधिनियम तथा बाल यौन शोषण रोकथाम अधिनियम (POCSO) की प्रावधानों का हवाला दिया।
शिकायतकर्ता ने तर्क दिया था कि बच्चे की गवाही मामले के तथ्यों को स्थापित करने के लिए आवश्यक है, पर कोर्ट ने यह रेखांकित किया कि बाल संरक्षण का अधिकार पारिवारिक विवादों में बच्चे की गवाही के संभावित महत्व से अधिक है।
मामले के अन्य विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, और पक्षों को वैकल्पिक साक्ष्य खोजने के लिए निर्देशित किया गया है। यह निर्णय संवेदनशील पारिवारिक मुकदमों में बच्चों को शामिल करने के प्रति न्यायपालिका की सतर्कता को दर्शाता है।
शिकायतकर्ता ने तर्क दिया था कि बच्चे की गवाही मामले के तथ्यों को स्थापित करने के लिए आवश्यक है, पर कोर्ट ने यह रेखांकित किया कि बाल संरक्षण का अधिकार पारिवारिक विवादों में बच्चे की गवाही के संभावित महत्व से अधिक है।
मामले के अन्य विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, और पक्षों को वैकल्पिक साक्ष्य खोजने के लिए निर्देशित किया गया है। यह निर्णय संवेदनशील पारिवारिक मुकदमों में बच्चों को शामिल करने के प्रति न्यायपालिका की सतर्कता को दर्शाता है।