📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Gazal world
बिज़नेस
गुजरात के फल विक्रेता ने दूसरों को व्यापार शुरू करने के लिए अपना बैंक खाता 15,000 रुपये में दिया
✍️ The Times of India
🗓 27 अक्टू. 2026, 11:02 AM
👁 17
गुजरात के एक फल विक्रेता, जो अपना व्यापार शुरू करने की योजना बना रहा है, ने अन्य उद्यमियों को अपना बैंक खाता 15,000 रुपये में उपयोग करने की अनुमति दी।
गुजरात के एक फल विक्रेता, जो अपना खुद का स्टॉल स्थापित करने की प्रक्रिया में है, ने अन्य व्यक्तियों को अपने बैंक खाते का उपयोग करने की अनुमति दी है, इसके बदले में 15,000 रुपये का शुल्क ले रहा है। स्थानीय मीडिया ने बताया कि यह व्यवस्था उन लोगों की मदद के लिए है जिनके पास औपचारिक बैंकिंग सुविधाएँ नहीं हैं, जबकि विक्रेता अतिरिक्त आय उत्पन्न करना चाहता है।
विक्रेता, जो अपना नाम नहीं बताना चाहता, ने कहा कि यह शुल्क प्रशासनिक खर्चों को कवर करेगा और एक मामूली लाभ मार्जिन प्रदान करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि यह सेवा केवल छोटे स्तर के व्यापारियों तक सीमित रहेगी, जिन्हें भुगतान प्राप्त करने और नकदी प्रवाह प्रबंधित करने के लिए अस्थायी खाते की आवश्यकता होती है।
प्राधिकरणों ने इस प्रथा की वैधता पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन वित्तीय विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि व्यक्तिगत बैंक विवरण साझा करने से दोनों पक्ष धोखाधड़ी और नियामक जांच के जोखिम में पड़ सकते हैं। विक्रेता का कहना है कि सभी लेन‑देन पारदर्शी और दस्तावेज़ित होंगे।
यदि यह मॉडल लोकप्रिय हो जाता है, तो यह गुजरात के ग्रामीण और अर्ध‑शहरी क्षेत्रों में अनौपचारिक सेक्टर के कई कार्यकर्ताओं द्वारा सामना किए जाने वाले बैंकिंग अंतर को पाटने का एक जमीनी समाधान दिखा सकता है।
विक्रेता, जो अपना नाम नहीं बताना चाहता, ने कहा कि यह शुल्क प्रशासनिक खर्चों को कवर करेगा और एक मामूली लाभ मार्जिन प्रदान करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि यह सेवा केवल छोटे स्तर के व्यापारियों तक सीमित रहेगी, जिन्हें भुगतान प्राप्त करने और नकदी प्रवाह प्रबंधित करने के लिए अस्थायी खाते की आवश्यकता होती है।
प्राधिकरणों ने इस प्रथा की वैधता पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन वित्तीय विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि व्यक्तिगत बैंक विवरण साझा करने से दोनों पक्ष धोखाधड़ी और नियामक जांच के जोखिम में पड़ सकते हैं। विक्रेता का कहना है कि सभी लेन‑देन पारदर्शी और दस्तावेज़ित होंगे।
यदि यह मॉडल लोकप्रिय हो जाता है, तो यह गुजरात के ग्रामीण और अर्ध‑शहरी क्षेत्रों में अनौपचारिक सेक्टर के कई कार्यकर्ताओं द्वारा सामना किए जाने वाले बैंकिंग अंतर को पाटने का एक जमीनी समाधान दिखा सकता है।