📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Finance, Government of India
बिज़नेस
जीएसटी परिषद के डिक्रिमिनलाइज़ेशन सुधार ने उद्योग में नया मानक स्थापित किया
✍️ Asianet Newsable
🗓 01 नव. 2026, 02:36 PM
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जीएसटी परिषद ने डिक्रिमिनलाइज़ेशन उपाय मंजूर किए, जिससे कर भुगतान में देर होने पर दंड हटाकर उद्योग पर बोझ कम किया जाएगा।
नई दिल्ली – जीएसटी परिषद ने अपने नवीनतम बैठक में ऐसे डिक्रिमिनलाइज़ेशन सुधार अपनाए हैं, जिनसे कर फाइलिंग में देर या कर भुगतान में चूक होने पर जेल की सज़ा समाप्त हो जाएगी। अब इन उल्लंघनों को आपराधिक मुकदमे के बजाय मौद्रिक दंड के रूप में दंडित किया जाएगा, जिससे व्यवसाय‑उन्मुख अनुपालन माहौल बनेगा।
परिषद के सदस्यों ने कहा कि यह कदम मुकदमेबाजी को कम करेगा, अनुपालन लागत घटाएगा और सभी क्षेत्रों में स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहित करेगा। जेल की सज़ा हटाकर छोटे और मध्यम उद्यमों पर बोझ कम होगा, जो अक्सर प्रक्रियात्मक देरी से जूझते हैं।
उद्योग संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत किया है, यह मानते हुए कि यह भारत के अप्रत्यक्ष कर ढांचे को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाता है। परिषद करदाताओं की प्रतिक्रिया के आधार पर दंड संरचना को समायोजित करने की संभावना रखती है।
डिक्रिमिनलाइज़ेशन पैकेज अगले वित्तीय वर्ष से लागू होगा, जिसके बाद वित्त मंत्रालय द्वारा आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी।
परिषद के सदस्यों ने कहा कि यह कदम मुकदमेबाजी को कम करेगा, अनुपालन लागत घटाएगा और सभी क्षेत्रों में स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहित करेगा। जेल की सज़ा हटाकर छोटे और मध्यम उद्यमों पर बोझ कम होगा, जो अक्सर प्रक्रियात्मक देरी से जूझते हैं।
उद्योग संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत किया है, यह मानते हुए कि यह भारत के अप्रत्यक्ष कर ढांचे को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाता है। परिषद करदाताओं की प्रतिक्रिया के आधार पर दंड संरचना को समायोजित करने की संभावना रखती है।
डिक्रिमिनलाइज़ेशन पैकेज अगले वित्तीय वर्ष से लागू होगा, जिसके बाद वित्त मंत्रालय द्वारा आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी।